टीम इंडिया के दिग्गज सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर इन दिनों चैंपियंस लीग टी20 टूर्नामेंट का हिस्सा बने हुए हैं। यहां भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर वे इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के लिए तैयारी करने के बजाए चैंपियंस लीग में क्या कर रहे हैं। हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप खेलकर लौटे धोनी, सहवाग और गंभीर के चेहरे पर थकावट साफ तौर से देखी जा रही है। इसके बावजूद तीनों आराम करने या घरेलू मैचों में टेस्ट के लिए हाथ साफ करने के बजाय लीग के लिए खेल रहे हैं।
सचिन को कौन समझाए
ऑस्ट्रेलिया बोर्ड ने दिग्गज आलराउंडर शेन वाटसन को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज की तैयारी के लिए चैंपियंस लीग छोड़कर स्वदेश लौटने का आदेश दिया है। वहीं टीम इंडिया के सबसे दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर नवंबर में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले टेस्ट मैचों की तैयारी करने के बजाय चैंपियंस लीग को तवज्जो दे रहे हैं। सचिन के बल्ले से आखिरी टेस्ट शतक पिछले साल जनवरी में केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ निकला था। इसके बाद से 25 टेस्ट पारियों में सचिन के बल्ले से कोई टेस्ट शतक नहीं निकल पाया है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ अगस्त में हुई घरेलू सीरीज में सचिन तीन पारियों में 19, 17 और 27 रन ही बना पाए थे। इंग्लैंड की टीम पूरी तैयारी के साथ भारत दौरे पर आ रही है, लेकिन टीम इंडिया के सबसे सीनियर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर टेस्ट की तैयारी के लिए टी20 टूर्नामेंट खेल रहे हैं।
टीम इंडिया को तवज्जो दें गंभीर, सहवाग
पिछले एक साल से टीम इंडिया मजबूत ओपनिंग के लिए तरस रही है। टीम की नियमित ओपनिंग जोड़ी वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर का बल्ला लगातार संघर्ष कर रहा है। पिछले एक साल के दौरान सहवाग घरेलू मैदानों पर क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट में कुछ खास नहीं कर सके हैं। सुनील गावस्कर के बाद भारत के सबसे सफल ओपनर माने जाने वाले वीरू 2008 के बाद से उपमहाद्वीप के बाहर कोई शतकीय पारी नहीं खेल पाए हैं।
वहीं गंभीर ने 2007 के बाद से जिस तरह की निरंतरता दिखाई, वह खत्म हो चुकी है। वर्ल्ड कप 2011 के बाद लगातार गंभीर का ग्राफ नीचे गया है। इन दोनों नियमित ओपनरों के फ्लॉप शो के चलते टीम इंडिया को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टेस्ट टीमों के सामने बेबस होकर घुटने टेकने पड़े। हाल ही में श्रीलंका में हुए टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भी इस ओपनिंग जोड़ी ने धोखा दिया। इसके बावजूद दोनों ओपनर इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले टेस्ट सीरीज की तैयारी करने के बजाय चैंपियंस लीग खेलकर समय बर्बाद कर रहे हैं।
धोनी टीम इंडिया के लिए सोचें
महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया टी20 और एकदिवसीय फॉर्मेट का वर्ल्ड कप जीतकर काफी नाम बटोर चुकी है। लेकिन इसी धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया पिछले एक साल से कई बड़े टूर्नामेंट में लगातार हार झेल रही है। खास बात यह है कि टेस्ट मैचों में तो खुद कप्तान का बल्ला भी शांत है।
पिछले पांच टेस्ट सीरीज पर नजर डालें तो न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज को छोड़ चार टूर्नामेंट में धोनी रन बनाने के लिए तरसते दिखे हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 मैच की 6 पारियों में केवल 102, इंग्लैंड के खिलाफ 4 मैच की 8 पारियों में 220 और वेस्टइंडीज में 3 मैच की 5 पारियों में 97 रन बनाए हैं। इसके अलावा वेस्टइंडीज के ही खिलाफ घरेलू मैदान पर 3 मैच की 5 पारियों में 165 रन बनाए हैं। साथ ही धोनी की कप्तानी में टीम को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शर्मनाक हार भी झेलनी पड़ी। क्रिकेट विश्लेषक टेस्ट टीम में धोनी की कप्तानी और उनके स्थान पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन धोनी इन सब से बेफिक्र चैंपियंस लीग खेलने में जुटे हैं।