इंग्लैंड को जीतने के लिए 6 गेंदों पर 14 रन चाहिए थे, तो वहीं भारत को जीतने के लिए दो विकेट। आखिरी ओवर फेंकने का दारोमदार उस गेंदबाज को मिला, जो रन देने के मामले में कंजूस गेंदबाज के नाम से विख्यात था, नाम है मुनाफ पटेल। पटेल की पहली गेंद को स्वान ने दो रनों के लिए खेला।
इंग्लैंड को अब जीतने के लिए पांच गेंदों में 12 रन की दरकार थी। दूसरी गेंद पर स्वान ने सिंगल लेकर छोर बदल लिया। तीसरी गेंद पर शहजाद ने जोरदार बल्ला घुमाया और गेंद को छह रन के लिए सीमा पार कर गई। मैच का रुख कभी भारत तो कभी इंग्लैंड की तरफ घड़ी की पैंडुलम की तरह लटक रहा था।
अगली तीन गेंदों में अब इंग्लैंड को पांच रनों की जरूरत थी। चौथी गेंद शहजाद के पैड पर लगी और दोनों बल्लेबाजों ने दौड़कर एक रन चुरा लिया। स्टेडियम में बैठे दर्शकों की सांसें गेंदबाजी कर रहे मुनाफ पटेल की सांसों से अधिक तेज हो गई थीं।
मैच का रोमांच सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। भारत को जीत के लिए दो गेंदों में दो विकेट, तो इंग्लैंड को जीत के लिए दो गेंदों में 4 रन की जरूरत थी। पांचवीं गेंद पर स्वान ने बड़ा शॉट खेलना चाहा, लेकिन गेंद उनके बल्ले के भीतरी किनारे को लेते हुए फील्डर के हाथों में गई, दोनों बल्लेबाजों ने दौड़कर दो रन पूरे कर लिए।
मैच की आखिरी गेंद पर इंग्लैंड को दो रन चाहिए थे। पटेल ने अंतिम गेंद फेंकी और स्वान ने जोरदार शॉट खेला, लेकिन गेंद सीधा फील्डर के हाथों में गई, कि इसी बीच दोनों ने दौड़कर एक रन पूरा कर लिया और विश्व कप के इतिहास में मैच को टाई करा लिया।
टीम इंडिया एक समय मैच में मजबूत थी लेकिन अंत में मैच के नतीजे ने जीत की मुस्कुराहट नहीं ला सकी। रोमांच की सारी हदों को पार करते हुए इंडिया और इंग्लैंड के बीच मैच टाई रहा। देश के लिए मुनाफ पटेल और धोनी के लिए मुन्ना ने अब संन्यास ले लिया है।