2009 में सबसे कम 85.7 मिलीमीटर हुई थी। 2014 में 95.4 मिलीमीटर, 1926 में 98.7 मिलीमीटर और 1923 में 102 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी। 2009 और 2014 ऐसे साल थे, जब अल-नीनो के प्रभाव के चलते मानसून कमजोर रहा। इस साल भी ऐसी ही स्थिति बताई जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार अब तक केवल अंडमान-निकोबार, पूर्वी राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में ही सामान्य से अधिक बारिश हुई है। जबकि कर्नाटक और लक्षद्वीप में सामान्य बारिश हुई है।
अच्छे मानसून की उम्मीद
मौसम विभाग को उम्मीद है कि 30 जून के बाद मानसून में अच्छी रफ्तार दिखाई देना शुरू हो जाएगी। इस बात की काफी उम्मीद है कि मानसून मध्य भारत और गुजरात के बाकी हिस्सों की ओर बढ़ेगा। जुलाई में कम दबाव के चलते मानसून के बेहतर होने की उम्मीद है। जुलाई का महीना खरीफ की फसल की बुआई के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस महीने को सबसे अधिक बारिश वाला महीना भी माना जाता है।