बृहस्पतिवार को उठे स्पॉट फिक्सिंग के बवंडर से जो राज निकले, वह किसी संस्पेंस सीरियल की कहानी से कम नहीं हैं।
दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने एक प्रेंस कांफ्रेंस कर इस शर्मनाक धांधलेबाजी की तो जानकारी दी ही, अपने पूरे ऑपरेशन का भी राज खोला।
पुलिस के खुलासे से पता चला कि क्रिकेट के मैदान पर रचा जा रहा रोमांच का तिलिस्म एक सोची-समझी रणनीति थी और दर्शक केवल ठगा जा रहा था।
श्री संत, अजित चंडिला, अंकित चव्हाण ये तीनों ही बॉलर हैं। इनके द्वारा मैदान पर फेंकी जा रही हर बॉल और हर इशारा खुद में कुछ न कुछ समेटे था।
पुलिस ने स्पॉट फिक्सिंग के सबूत के तौर पर मैच का वीडियो दिखाने के साथ ही बुकीज और खिलाड़ियों के बीच रिकॉर्ड बातचीत भी सुनवाई।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक कुछ इस तरह है पूर एपीसोड की कहानी...
- सटोरियों और खिलाड़ियों के बीच हर ओवर में कितने रन देने हैं इस पर सहमति थी।
- तय किया गया था कि तीनों बॉलरों और बुकियों के बीच किस तरह इशारों में बातचीत होनी है। श्रीसंत को तौलिया, चंडिला को टी-शर्ट और चव्हाण को रिस्ट बैंड से बुकी को इशारा करना था। अंकित को एक ओवर के लिए 60 लाख रुपये दिए जाने थे।
- अजित चंडिला को 20 लाख रुपये दिए जाने थे लेकिन चंडिला तय संकेत नहीं दे पाए जिसके बाद पैसे की वापसी को लेकर बहस हुई। पुलिस ने चंडिला का एक ओवर का वीडियो दिखाया, उस ओवर में कितने रन देने हैं यह पहले से तय था।
- नौ मई को हुए मैच में श्रीसंत ने अपने स्पेल के दूसरे ओवर में 13 रन देना स्वीकार किया था। सिग्नल था कि वो दूसरे ओवर के दौरान ट्राउजर में छोटा तौलिया रखेंगे।
- श्रीसंत के साथ सट्टेबाज ने तय किया था वो दूसरे ओवर में अपने आगे तौलिया रखेंगे। सट्टेबाज ने समय मांगा कि इस ओवर में पहले थोड़ा टाइम मिले ताकि सट्टा तय हो सके।
- जिन तीन मैचों के दौरान स्पॉट फिक्सिंग की गई, उन सभी में दिल्ली पुलिस मौजूद थी क्योंकि उसे आशंका थी सटोरियों को दिए जाने वाले इशारे कमर्शियल ब्रेक के दौरान दिए जाते हों।
इस स्पॉट फिक्सिंग का मास्टर माइंड विदेश में है, लेकिन किस देश में ये नहीं बता सकता। जहां तक अंडरवर्ल्ड का सवाल है तो मैं इतना ही कह सकता हूं कि अंडरवर्ल्ड इसमें शामिल है। श्रीसंत को सट्टेबाजों ने सीधे पैसा नहीं दिया बल्कि किसी के जरिए दिया गया जिसका नाम जीजू है।
- नीरज कुमार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर