एशिया कप में धमाकेदार प्रदर्शन के कारण शिखर धवन से उम्मीद थी कि वह वेस्टइंडीज के खिलाफ भी प्रभावित रखना जारी रखेंगे। मगर उनका फॉर्म लगातार गिरता दिखाई दिया। बाएं हाथ के बल्लेबाज को दूसरे तीसरे और चौथे वन-डे में अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन वह उसे बड़ी पारी में तब्दील करने में सफल नहीं हुए।
धवन ने दूसरे, तीसरे व चौथे वन-डे में क्रमश: 29, 35 और 38 रन बनाए। गब्बर के बल्ले से सीरीज के पांच मैचों में केवल 112 रन निकले। बहरहाल, टीम इंडिया और फैंस को उम्मीद रहेगी कि बाएं हाथ का बल्लेबाज अपनी लय में लौटे।
महेंद्र सिंह धोनी ने तीन पारियों में सिर्फ 50 रन बनाए। पुणे में खेले गए तीसरे वन-डे में जब धोनी से बेहतर पारी की उम्मीद थी तो पूर्व कप्तान ने निराश किया। धोनी वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में टीम इंडिया की तरफ से 10,000 रन पूरे करने से भी चूक गए।
धोनी का बल्लेबाजी फॉर्म टीम प्रबंधन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। टीम इंडिया का मिडिल ऑर्डर लगातार संघर्ष कर रहा है। धोनी के फॉर्म में लौटने का इंतजार टीम इंडिया के साथ-साथ फैंस को भी बेसब्री से है।
टीम इंडिया के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले तीन वन-डे में खेलने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने पांच विकेट झटके। हालांकि, चहल की इस दौरान जमकर पिटाई भी हुई और एशिया कप के बाद उनके प्रदर्शन में भी लगातार गिरावट देखने को मिली।
चहल के प्रदर्शन पर अगर इंग्लैंड दौरे से ध्यान दिया जाए तो पाएंगे कि 11 वन-डे में केवल 13 विकेट लिए। वैसे, फील्डिंग में भी चहल का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। अब जब जडेजा बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो ऐसे में चहल का अंतिम एकादश में शामिल होना मुश्किल बन सकता है।
उमेश यादव ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया और सीमित ओवर क्रिकेट में भी जगह बनाई। हालांकि, वह अपनी प्रतिभा के मुताबिक वन-डे सीरीज में प्रदर्शन नहीं कर सके।
सफेद गेंद के क्रिकेट में यादव ने विकेट लेने की कोशिश जरूर की, लेकिन वह रन रोकने में कामयाब नहीं हुए। दाएं हाथ के तेज गेंदबाज को सीरीज में दो मैच खेलने को मिले, जिसमें उन्होंने कुल 142 रन खर्च करके सिर्फ एक विकेट लिया। खलील अहमद के शानदार प्रदर्शन से उमेश की उम्मीदों को तगड़ा झटका लग सकता है।
टीम इंडिया का डीआरएस लेने के खराब रिकॉर्ड में सुधार नहीं दिख रहा है। एमएस धोनी के फैसलों को हटा दें तो टीम इंडिया का डीआरएस के प्रति संघर्ष जारी है। तीसरे वन-डे में टीम इंडिया ने पारी के चौथे ओवर में डीआरएस बर्बाद कर दिया। अगले वन-डे में बुमराह के कहने पर एक बार फिर डीआरएस खराब गया।
बहरहाल, टीम इंडिया को वन-डे सीरीज में कई सकारात्मक पहलू मिले, लेकिन ये कुछ ऐसी कमियां हैं, जिस पर कप्तान कोहली और टीम प्रबंधन को ध्यान देना जरूरी है। विश्व कप नजदीक है और टीम इंडिया को खिताब जीतने के लिए कोई कमी नहीं छोड़नी होगी।