दीपक चाहर के पिता लोकेन्द्र सिंह को वर्षों से इस दिन का इंतजार था कि जब उनके बेटे का जादुई प्रदर्शन देश को जीत दिलाए। उनका कहना है कि ऐसे प्रदर्शन के लिए दीपक ने कड़ी मेहनत की है। लाखों गेंदें नैट प्रैक्टिस के दौरान फेंकी है तब ऐसा प्रदर्शन हुआ है। लोकेन्द्र खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन उनके पिता ने उन्हें अनुमति नहीं दी लेकिन जब उन्होंने 12 साल की उम्र में दीपक का हुनर देखा तो उन्हें अपना ख्वाब पूरा करने की इजाजत दे दी जो दरअसल कभी उनका ख्वाब था, देश के लिए क्रिकेट खेलना।
फोन पर हुई बातचीत में लोकेन्द्र कहते हैं कि मेरे पास कोचिंग की डिग्री नहीं थी लेकिन मैंने दीपक को सिखाने के लिए बाद में खुद ट्रेनिंग ली। भारत के इस युवा तेज गेंदबाज के विकसित होने की शुरुआत आगरा में ऐतिहासिक ताज महल के पीछे बने मैदान के टर्फ से हुई है। भारतीय वायुसेना से रिटायर लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि अब लगता है कि जो सपना हम दोनों ने इकट्ठा देखा था वो धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहा है।