श्रीलंका की पारी में पहले दो विकेट जरूर जल्दी गिर गए थे, लेकिन उसके बाद सबकुछ ठीक चल रहा था। कुमार संगाकारा और लेहरू की जोड़ी अच्छे रन बना रही थी।
एक बारगी तो ऐसा लग रहा था कि श्रीलंका की टीम 300 के आसपास रन बना लेगी।
38वें ओवर में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिसके बाद पूरी श्रीलंका पारी एक के बाद एक करके ध्वस्त होती चली गई। इसे ही मैच का टर्निंग पाइंट कहा जाए तो गलत नहीं होगा। ये टर्निंग पाइंट दिलाया इशांत शर्मा ने।
जब उसने लेहरू को 46 के निजी स्कोर पर बाउंड्री लाइन पर भुवनेश्वर के हाथों कैच आउट करवा दिया। उस समय श्रीलंका का स्कोर 171 रन था, उसके बाद तो जैसे श्रीलंका के विकेटों की झड़ी लग गई।
40वें ओवर में श्रीलंका के 2 विकेट गिरे। गेंदबाज अश्विन ने ओवर की पहली गेंद पर कुमार संगाकारा को बाउंड्री पर विनय कुमार से कैच आउट करवाया। उसके बाद तो कोई बल्लेबाज दहाई के आंकड़े तक भी न पहुंचा।
श्रीलंका ने अंतिम 11 ओवर्स में मात्र 30 रन पर अपने 8 बहुमूल्य विकेट गंवा दिए। इसी के कारण श्रीलंका की पूरी पारी 201 रन पर सिमट गई।