दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत को 3-0 से हार का सामना करना पड़ा है। पहला मैच भारत 31 रन से हारा था। दूसरा मैच सात विकेट से और तीसरा मैच चार रन के करीबी अंतर से हारा। इस सीरीज में भारतीय टीम तीनों मैच बीच के ओवरों में हारी है। भारत के बल्लेबाज ना तो बीच के ओवरों में रन बना पाए और ना ही गेंदबाज विकेट ले पाए। तीसरे मैच के बाद टीम इंडिया के कोच राहुल द्रविड़ ने भी कहा कि लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्हें दोनों मैचों में 30वें ओवर तक लग रहा था कि भारत मैच जीतेगा, लेकिन दोनों बार बल्लेबाज खराब शॉट खेलकर आउट हुए।
शुरुआती झटके नहीं दे पाए गेंदबाज
इस सीरीज में भारतीय गेंदबाज दक्षिण अफ्रीका को शुरुआती झटके नहीं दे पाए। पहले और तीसरे मैच में यानेमन मलान सस्ते में आउट हुए, लेकिन भारतीय गेंदबाज इसका फायदा नहीं उठा सके। शुरुआती 10 ओवरों में भारत ने जमकर रन लुटाए। पहले वनडे में भारतीय गेंदबाजों ने पावरप्ले में 39, दूसरे वनडे में 66 और तीसरे वनडे में 53 रन खर्चे। पहले मैच में भारत ने शुरुआत में अफ्रीकी टीम पर दबाव बना लिया था, लेकिन बाद में वापसी का मौका दिया और मैच हार गए।
भारतीय गेंदबाजों ने 2019 वर्ल्डकप के बाद से 24 वनडे मैचों में शुरुआती 10 ओवर में सिर्फ 11 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान भारतीय गेंदबाजों ने करीब 5.7 की इकोनॉमी से रन लुटाए हैं, जो कि वनडे खेलने वाले बाकी देशों में सबसे ज्यादा है। 2019 विश्व कप के बाद पावरप्ले में टीम इंडिया का गेंदबाजी औसत 132.00 (सबसे खराब) रही है।
भारतीय स्पिनर्स पूरी तरह फ्लॉप रहे
इस सीरीज में भारत के स्पिन गेंदबाज पूरी तरह फ्लॉप रहे। पहले वनडे में चहल और अश्विन की जोड़ी ने 20 ओवर में 106 रन देकर एक विकेट लिया। दूसरे वनडे में 20 ओवर में 115 रन देकर एक विकेट लिया और तीसरे मैच में चहल, जयंत और श्रेयस की तिकड़ी ने 22 ओवर में 121 रन देकर एक विकेट निकाला। 2017-18 में जब भारत पिछली बार सीरीज जीता था, तब चहल और कुलदीप की स्पिन जोड़ी ने कमाल किया था। दोनों छह मैचों की सीरीज में 15.09 के औसत से 33 विकेट चटकाए थे। ये दोनों सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे।
इस सीरीज में अफ्रीका के एडेन मार्करम, केशव महाराज और तबरेज शम्सी की स्पिन तिकड़ी ने कमाल की गेंदबाजी की। पहले वनडे में अफ्रीकी स्पिन गेंदबाजों ने 26 ओवर में 124 रन देकर चार विकेट निकाले। दूसरे वनडे में 26 ओवर में 143 रन देकर चार विकेट और तीसरे वनडे में 13 ओवर में 60 रन देकर सेट बल्लेबाज विराट कोहली को आउट किया। स्पिन गेंदबाजों का अंतर हार और जीत की बड़ी वजह बना।
सीनियर गेंदबाजों का खराब प्रदर्शन
इस सीरीज में भुवनेश्वर और अश्विन जैसे सीनियर गेंदबाज फ्लॉप रहे। भुवनेश्वर पार्ल में खेले गए दोनों वनडे में काफी महंगे साबित हुए। उन्होंने पहले मैच 64 रन लुटाए थे तो दूसरे वनडे में 67 रन दिए। इस दौरान भुवनेश्वर कुमार को एक सफलता भी नहीं मिली। वहीं अश्विन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो वनडे में सिर्फ एक ही विकेट ले सके। भारतीय गेंदबाजों ने हर मैच में दक्षिण अफ्रीका को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका दिया। इसी वजह से अफ्रीकी टीम आसानी से 300 के करीब पहुंच सकी।
वहीं तीसरे मैच में दीपक चाहर ने शुरुआत में विकेट लिए और आखिरी ओवरों में भी सभी गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसी वजह से अफ्रीकी टीम पहली बार सीरीज में ऑल आउट हुई।
लक्ष्य का पीछा करना भूले बल्लेबाज
भारतीय टीम हमेशा से ही लक्ष्य का पीछा करने में माहिर रही है, लेकिन इस सीरीज में ऐसा नहीं दिखा। भारत दो मैच लक्ष्य का पीछा करते हुए हारा और 30 ओवरों तक दोनों मैच भारत की पकड़ में थे। इसके बाद बल्लेबाजों ने गलत शॉट खेले और अपने विकेट गंवाए। बीच के ओवरों में भी भारतीय बल्लेबाज लंबी साझेदारियां नहीं कर सके। अगर साझेदारी हुई भी तो एक बड़ी साझेदारी के टूटते ही गुच्छे में विकेट गिरे।
श्रेयस, पंत, दीपक चाहर और वेंकटेश जैसे बल्लेबाज लगातार खराब शॉट खेलकर पवेलियन लौटे। वहीं धवन और विराट जैसे खिलाड़ी सेट होने के बावजूद बड़ी पारी नहीं खेल पाए।
कप्तान राहुल का खराब प्रदर्शन
इस सीरीज में कप्तान पूरी तरह फ्लॉप रहे। दो मैचों में वो बहुत जल्दी आउट हुए और सिर्फ एक मैच में अर्धशतक लगा पाए। इस पारी में भी उन्हें तीन जीवनदान मिले थे और उन्होंने बहुत धीमी पारी खेली थी। बल्ले के अलावा कप्तानी के मोर्चे में भी राहुल कुछ खास नहीं कर पाए। उन्होंने गेंदबाजों को बहुत ही साधारण तरीके से चलाया और हर मैच में अफ्रीकी टीम को वापस आने का मौका दिया। राहुल खिलाड़ियों के अंदर वो ऊर्जा नहीं भर पाए, जो विराट के नेतृत्व में दिखती थी।
रोहित जडेजा की कमी खली
इस सीरीज में भारत को साफ तौर पर रोहित शर्मा और जडेजा की कमी खली। रोहित उन खिलाड़ियों में से एक हैं जो एक बार टिकने पर लंबी पारी खेलते हैं। हर सीरीज में रोहित अपने दम पर एक मैच जिताते ही हैं। इस सीरीज में एक ओपनर के रूप में रोहित की कमी खली। वहीं जडेजा के न होने से भारत ने अश्विन और जयंत को मौका दिया। ये दोनों खिलाड़ी कुछ खास नहीं कर पाए। वहीं जडेजा वनडे में कंजूसी के साथ गेंदबाजी करने के अलावा विस्फोटक बल्लेबाजी भी करते हैं। वो लक्ष्य का पीछा करते समय भारत के लिए अहम खिलाड़ी हो सकते थे।