राहुल के साथ विराट और द्रविड़ का जश्न
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इंग्लैंड के खिलाफ पुणे में खेले गए दूसरे वनडे में भले ही टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन केएल राहुल ने एकबार फिर खुद को साबित किया। बताया कि वह किसी भी स्थान, मौके और भूमिका में टीम के लिए उपयोगी हैं। शुरुआती ओवर्स में ही ओपनर्स को गंवाने के बाद विराट के साथ मिलकर टीम के स्कोर को 37 रन से 158 तक ले गए। कप्तान के साथ दूसरे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी की।
विराट भले ही फिफ्टी लगाकर आउट हो गए, लेकिन अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए राहुल ने अंत तक बल्लेबाजी की कोशिश की। ऋषभ पंत के साथ तेजी से रन बटोरे। अपने करियर का पांचवां वनडे शतक पूरा किया। सेंचुरी जड़ने के बाद राहुल ज्यादा देर नहीं टिक सके और टॉम की गेंद टॉपले को कैच थमा बैठे।
राहुल ने पंत के साथ चौथे विकेट के लिए 113 रनों की साझेदारी की। राहुल ने शतक जड़ने के बाद ड्रेसिंग रूम की ओर बल्ला उठाकर साथियों का अभिवादन किया और उसके बाद दोनों हाथों से कानों को ढक लिया। शायद उनका इशारा इस ओर था कि वह आलोचनाओं की ओर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे।
इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में वह खराब फॉर्म से गुजर रहे थे और तब उनके टीम में चयन को लेकर सवाल उठने लगे थे। उन्होंने बाद में कहा कि आपको कभी-कभी आलोचकों को नजरअंदाज करने की जरूरत होती है। मैंने सिर्फ आलोचनाओं के शोर को दबाने के अंदाज में ऐसा किया था, मैंने किसी को तिरस्कृत नहीं किया है। टी-20 सीरीज के बाद मैं निराश था। अब बेहद खुश हूं। विराट और पंत के साथ अच्छी साझेदारियां कर पाया।
याद आया विराट और द्रविड़ का जश्न
2018 में विराट ने भी सेंचुरी के बाद आलोचकों को चुप कराया था। दरअसल, एडिलेड में वह शतक से वंचित रह गए थे। तब उनकी आलोचना हुई थी, लेकिन अगले मैच में सैकड़ा जड़ने के बाद उन्होंने बल्ले के बीच (स्वीट स्पॉट) पर ग्लव्स मारकर बताया कि उनकी ओर से उनका बल्ला बोलता है। सामान्यत: शांत एवं संयमी रहने वाले राहुल द्रविड़ ने भी 2001 में ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ कोलकाता टेस्ट में शतक बनाने के बाद प्रेस बॉक्स की ओर गुस्से से अपना हेलमेट दिखाया था।