भारत और आॅस्ट्रेलिया के बीच पर्थ टेस्ट में सबसे बड़ा अंतर विशेषज्ञ स्पिनर रहा। कंगारू आॅफ स्पिनर नाथन लियोन दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा फर्क रहे। मैच में कुल 8 विकेट झटकने वाले लियोन को पर्थ टेस्ट में मैन आॅफ द मैच चुना गया। पता हो कि पर्थ की पिच तेज गेंदबाजों के लिए मददगार थी।
टीम इंडिया के प्रमुख आॅफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन चोटिल होने की वजह से दूसरे टेस्ट से बाहर हुए। हालांकि, कप्तान कोहली के पास उनकी जगह रवींद्र जडेजा को शामिल करने का मौका था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। भारत ने चार विशेषज्ञ तेज गेंदबाज के साथ मैदान संभाला। नतीजा अब सभी के सामने है।
टीम इंडिया के ओपनर्स कोई कमाल नहीं दिखा पा रहे हैं। एडिलेड के बाद पर्थ में भी भारत के दोनों ओपनर्स ने निराश किया। केएल राहुल से विशेषकर क्रिकेट जगत के लोग नाराज हैं क्योंकि वह बहुत ही लचर प्रदर्शन कर रहे हैं। कोहली के पास अनुभवी पार्थिव पटेल और अन्य बल्लेबाज मौजूद हैं, जो ओपनिंग कर सकते हैं। मगर कप्तान कोहली ने राहुल पर ही भरोसा जताया।
इसकी कीमत भी टीम इंडिया को चुकानी पड़ी क्योंकि दूसरी पारी में भारत को दमदार शुरुआत की सख्त जरूरत थी। मुरली विजय ने जरूर कुछ जज्बा दिखाया, लेकिन राहुल पूरी तरह फ्लॉप रहे। भारतीय टीम को अब सीरीज में दमदार वापसी करनी है तो उसे अगले मैच में अपने ओपनर्स के संयोजन पर जरूर सोचना होगा।
विराट कोहली की सेना और आॅस्ट्रेलिया के बीच यह भी बड़ा फर्क रहा। भारत के पुछल्ले बल्लेबाज बिलकुल भी प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं जबकि आॅस्ट्रेलिया के टैलेंडर्स टीम का स्कोरबोर्ड बढ़ाने में उम्दा योगदान देते आ रहे हैं।
पर्थ टेस्ट की पहली पारी में आॅस्ट्रेलिया के प्रमुख बल्लेबाज 251 रन के योग पर पवेलियन लौट चुके थे, लेकिन यहां से पुछल्ले बल्लेबाजों ने मोर्चा संभाला और 70 से अधिक रन स्कोरबोर्ड पर टांगते हुए स्कोर 326 रन पर पहुंचा दिया।
विराट कोहली ने अपने गेंदबाजों को आराम देना ठीक समझा, जिसका परिणाम उन्हें भुगतना पड़ा क्योंकि आॅस्ट्रेलिया को पहली पारी के आधार पर 43 रन की बढ़त मिली, जो निर्णायक साबित हुई।
टीम इंडिया के नंबर-6 बल्लेबाज की समस्या दूर होने का नाम ही नहीं ले रही है। एडिलेड में रोहित शर्मा को आजमाया गया, जो सफल नहीं हुए और फिर चोटिल होने के बाद पर्थ टेस्ट से बाहर हो गए। पर्थ में हनुमा विहारी पर भरोसा जताया गया, लेकिन वे भी सफल नहीं रहे।
भारत के पुछल्ले बल्लेबाजों से तो किसी प्रकार की उम्मीद ही नहीं की जा रही है। वे आते हैं और जल्द पवेलियन लौट जाते हैं। भारत के अंतिम पांच बल्लेबाज 28 रन के भीतर ही पवेलियन लौट रहे हैं।
विदेश में जीत दर्ज करने के लिए भारत के पुछल्ले बल्लेबाजों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाना होगी। विराट को यह बात मन से हटाना होगी कि सिर्फ बल्लेबाजों के दम पर ही टेस्ट जीत लिया जाएगा क्योंकि यह टीम गेम है। उन्हें इसे समझते हुए पुछल्ले बल्लेबाजों पर भी जिम्मेदारी सौंपना होगी।
विराट कोहली मैच में अकेले शतकवीर रहे। मगर अन्य भारतीय बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। अजिंक्य रहाणे ने जरूर अर्धशतक जमाया, लेकिन दूसरी पारी में वह कुछ खास नहीं कर सके। विराट कोहली अपने बल्लेबाजों को प्रोत्साहित करने में नाकाम हो रहे हैं कि वह क्रीज पर जाकर बेहतरीन प्रदर्शन करें।
टीम इंडिया की बल्लेबाजी में गहराई है और इसका फायदा टीम को उठाना चाहिए। भारत के पास आॅस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने का सुनहरा मौका है और इन्हें कमियों को जल्द पीछे छोड़ना होगा।