भारत ऑस्ट्रेलिया बॉक्सिंग डे टेस्ट
- फोटो : BCCI
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया बॉक्सिंग डे टेस्ट
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बॉक्सिंग-डे क्यों? (पहली कहानी- चर्च में क्रिसमस पर रखा जाता है बॉक्स)
बॉक्सिंग डे से जुड़ी पहली कहानी यह है कि चर्च में क्रिसमस के दौरान एक बॉक्स रखा जाता है। चर्च आने वाले लोग इस बॉक्स में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए गिफ्ट रखते हैं। क्रिसमस के अगले दिन उस बॉक्स को खोला जाता है और गिफ्ट में मिले सामानों को गरीबों में बांट दिया जाता है। क्रिश्चियन लोगों की शादी भी चर्च में होती है। शादी में मिले गिफ्ट को बॉक्स में रखा जाता है और उसे 26 दिसंबर को खोलने की परंपरा है।
बॉक्सिंग-डे क्यों? (दूसरी कहानी- मेहनती लोगों को सलाम करने का दिन)
दरअसल, बॉक्सिंग-डे के पीछे एक दिलचस्प कहानी भी है। क्रिसमस के दिन भी छुट्टी न लेकर काम करने वालों के लिए इस दिन का नाम बॉक्सिंग डे पड़ा। इस दिन उनके काम की तारीफ की जाती है। छुट्टी न लेकर काम करने का जज्बा ही बॉक्सिंग डे कहलाता है। क्रिकेटर्स भी त्योहार में अपने घर पर न रहकर मैच खेलते हैं, तो इस वजह से बॉक्सिंग डे का कनेक्शन मैचों से भी जोड़ दिया गया।
बॉक्सिंग-डे क्यों? (कहानी नंबर-तीन: क्रिसमस बॉक्स)
वेस्टर्न क्रिश्चियनिटी के कैलेंडर के मुताबिक क्रिसमस डे के अगले दिन (26 दिसंबर) को बॉक्सिंग डे कहते हैं। आयरलैंड और स्पेन जैसे कई देशों में इसे सेंट स्टीफंस डे भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि क्रिसमस के अगले दिन लोग एक-दूसरे को क्रिसमस (गिफ्ट) बॉक्स गिफ्ट करते हैं। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के मुताबिक, बॉक्सिंग डे क्रिसमस की छुट्टी के बाद हफ्ते का पहला दिन होता है। छुट्टियों के बाद कई लोग काम पर जाते हैं और उनके मालिक क्रिमसम उपहार के रूप में उन्हें बॉक्स गिफ्ट करते हैं। इसलिए इस दिन का नाम बॉक्सिंग डे पड़ा।