पाकिस्तानी बोर्ड के मुताबिक पीसीबी ने बीसीसीआई के साथ साल 2014 में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत छह द्विपक्षीय सीरीज खेलने पर सहमति बनी थी। जिनमें पाकिस्तान की मेजबानी में घरेलू सीरीज शामिल थी। मगर भारत ने 2008 से अब तक पाकिस्तान के साथ उनकी मेजबानी में ऐसी कोई भी सीरीज नहीं खेली
हालांकि दोनों देश आईसीसी व अन्य मल्टीनेशन टूर्नामेंटों में टकराते रहते हें। पीसीबी के मुताबिक सहमति पत्र के तहत दोनों देशों को 2015 से 2023 के बीच छह द्विपक्षीय सीरीज खेलनी थी, लेकिन बीसीसीआई के टीम नहीं भेजने से पीसीबी रो भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
पाकिस्तान को मुआवजा देने की मांग पर BCCI के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा, 'यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मामला है इसमें आईसीसी क्या कर रहा है? आईसीसी हमें खेलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है और बीसीसीआई पर कोई दबाव अंतरराष्ट्रीय संकट का कारण बन सकता है।'
ठाकुर ने कहा, 'पाकिस्तान को एक पैसा भारत नहीं देगा। ठाकुर ने कहा कि पहले पाकिस्तान आतंकवाद का खात्मा करे तब उसके साथ क्रिकेट खेलने पर सोचा जा सकता है।'
राजीव शुक्ला ने कहा है कि बीसीसीआई को पीसीबी के साथ क्रिकेट में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन कुछ मुद्दे हैं जिन्हें सरकार के स्तर पर सुलझाना पड़ेगा।
राजीव शुक्ला ने कहा, 'जहां तक मेरी राय है तो बीसीसीआई और पीसीबी को अपने मसले खुद सुलझाने चाहिए न कि उन्हें आईसीसी के पास ले जाना चाहिए। बीसीसीआई तो पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना चाहता है लेकिन कुछ मुद्दे हैं और इसलिए बीसीसीआई को पाकिस्तान जाकर क्रिकेट खेलने के लिए सरकार की अनुमति चाहिए.'
राजीव शुक्ला ने कहा, 'भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट या एशियाई क्रिकेट काउंसिल के टूर्नामेंट में पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से कभी इनकार नहीं किया है इसलिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को पैसा देने का कोई सवाल नहीं उठता है।