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Kapil-Kambli: कपिल देव ने विनोद कांबली की स्थिति पर दुख जताया, बोले - उन्हें खुद की मदद की जरूरत

Mon, 09 Dec 2024 07:55 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांबली ने भारत के लिए 1991 से 2000 तक 17 टेस्ट और 104 वनडे मुकाबले खेले हैं। कांबली ने स्कूल स्तर पर तेंदुलकर के साथ ऐतिहासिक 664 रन की अटूट साझेदारी की थी। बाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज कांबली ने पिछले कुछ वर्षों में कई स्वास्थ्य चुनौतियों से संघर्ष किया है।
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विनोद कांबली - फोटो : Twitter
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विस्तार
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भारत को अपनी कप्तानी में 1983 विश्व कप का खिताब दिलाने वाले पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने पूर्व बल्लेबाज विनोद कांबली की स्थिति पर दुख जताया है। कपिल का कहना है कि कांबली को बाहरी सहायता के साथ-साथ खुद की मदद की भी जरूरत है। कांबली शराब से जुड़ी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। हाल ही में दिग्गज कोच रमाकांत आचरेकर की याद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान वह काफी कमजोर दिखाई दिए। उन्हें अपने बचपन के दोस्त सचिन तेंदुलकर को जाने से रोकते देखा गया था।
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लंबे समय से स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहे हैं कांबली 
कांबली ने भारत के लिए 1991 से 2000 तक 17 टेस्ट और 104 वनडे मुकाबले खेले हैं। कांबली ने स्कूल स्तर पर तेंदुलकर के साथ ऐतिहासिक 664 रन की अटूट साझेदारी की थी। बाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज कांबली ने पिछले कुछ वर्षों में कई स्वास्थ्य चुनौतियों से संघर्ष किया है। उन्हें 2012 में एंजियोप्लास्टी करानी पड़ी थी। इसके बाद 2013 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा। शराब की लत से जूझने के कारण उन्हें कई बार रिहैबिलिटेशन के लिए जाना पड़ा। इससे उनके समग्र स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ा।

कपिल ने कांबली से रिहैब में वापस जाने कहा 
कपिल ने कहा, हम सभी को कांबली का समर्थन करने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन हमारे से अधिक उसे खुद का समर्थन करना है। अगर कोई व्यक्ति खुद का ख्याल नहीं रख सकता तो हम उसका ख्याल नहीं रख सकते। हमने जो देखा है, उससे सभी क्रिकेटर बहुत दुखी हैं। मैं चाहता हूं कि उनके सबसे करीबी दोस्त उन्हें कुछ मदद दिलवाएं, ताकि वह खुद का ख्याल रख सकें और रिहैब में वापस जा सकें। लोगों को यह बीमारी होती है लेकिन आपको रिहैब में वापस जाना पड़ता है।
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गावस्कर ने कांबली को बेटे की तरह बताया था
कपिल से पहले भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी कांबली को लेकर अपनी राय रखी थी। गावस्कर ने कहा था, 'मुझे लगता है कि 1983 की विश्व विजेता टीम हमारे युवा खिलाड़ियों के प्रति बहुत सचेत है। वे हमारे बेटे की तरह हैं। हम अपने क्रिकेटरों के बारे में बहुत चिंतित हैं, खासकर जब भाग्य उनका साथ छोड़ देता है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि यहां मदद करना शब्द सही रहेगा। '83 की टीम कांबली की देखभाल करना चाहती है और उन्हें अपने पैरों पर वापस खड़े होने में मदद करना चाहती है। हम इसे कैसे करेंगे, यह हम निकट भविष्य में देखेंगे। हम कांबली समेत उन क्रिकेटरों की देखभाल करना चाहते हैं, जिन पर भाग्य कभी-कभी कठोर हो जाता है। '83 की टीम यही करना चाहती है।'
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