भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 सीरीज खत्म हो चुकी है। टीम इंडिया ने सीरीज के तीनों मैच जीतकर एक बार फिर कैरिबियाई टीम का सूपड़ा साफ कर दिया है। इस सीरीज में सूर्यकुमार और वेंकटेश अय्यर का अच्छा प्रदर्शन भारत के लिए सबसे अच्छी बात थी, लेकिन खराब फील्डिंग और ईशान किशन की फॉर्म ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। 24 फरवरी से भारत को श्रीलंका के खिलाफ टी-20 सीरीज खेलनी है। इस सीरीज में रोहित और द्रविड़ भारत की फील्डिंग के साथ-साथ ओपनिंग जोड़ी पर काम करना चाहेंगे।
यहां हम बता रहे हैं कि इस सीरीज में भारत के लिए क्या सकारात्मक पहलू रहे और किन क्षेत्रों में टीम इंडिया को अभी भी काम करने की जरूरत है।
मध्यक्रम की समस्या खत्म
इस सीरीज में भारत के मध्यक्रम बल्लेबाजों का प्रदर्शन लाजवाब रहा। ऋषभ पंत, वेंकटेश अय्यर और सूर्यकुमार यादव ने तीनों मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया। टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं थी, बल्कि सभई बल्लेबाज अच्छी लय में थे। सूर्यकुमार यादव प्लेयर ऑफ द सीरीज भी बने। पंत, वेंकटेश और सूर्यकुमार ने मिलकर हर मैच में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की। इसी वजह से हर मैच में साधारण शुरुआत के बावजूद भारतीय टीम बड़ा स्कोर बनाने में कामयाब रही। अगर ये तीनों खिलाड़ी आगे भी ऐसा ही प्रदर्शन कर पाते हैं तो भारत की बड़ी समस्या खत्म हो सकती है।
युवा गेंदबाजों का बेहतरीन प्रदर्शन
टी-20 सीरीज में भुवनेश्वर और चहल के अलावा कोई भी अनुभवी गेंदबाज नहीं था, लेकिन हर मैच में युवा गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। दीपक चाहर, हर्षल पटेल और रवि बिश्नोई ने शानदार गेंदबाजी की और वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को लंबी साझेदारी नहीं करने दी। एक मैच में ऐसा हुआ, लेकिन आखिरी के ओवरों में भारतीय गेंदबाज अपनी टीम को मैच में वापस ले आए और जीत भी दिलाई।
रवि बिश्नोई शानदार खोज
वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में रवि बिश्नोई ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इस सीरीज में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया और यह साबित किया कि उनके अंदर लंबे समय तक भारतीय टीम में खेलने की क्षमता है। बिश्नोई ने बड़े छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों के सामने कंजूसी से रन खर्चे और विकेट भी निकाले।
कप्तान रोहित सुपरहिट
वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज में रोहित का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने पहले वनडे और फिर टी-20 सीरीज में कैरिबियाई टीम का सूपड़ा साफ किया। कप्तान के रूप में रोहित ने बहुत ही बेहतरीन तरीके से अपने गेंदबाजों को चलाया। इस टीम में बुमराह, जडेजा और शमी जैसे प्रमुख गेंदबाज नहीं थे, लेकिन रोहित ने दीपक चाहर , भुवनेश्वर कुमार और हर्षल पटेल के दम पर कैरिबियाई बल्लेबाजों को रन बनाने से रोका।
राहुल की कप्तानी में भुवनेश्वर और चहल जैसे गेंदबाज बेअसर साबित हुए थे, लेकिन रोहित के वापस आते ही दोनों गेंदबाज अपनी पुरानी लय में लौट आए। रोहित ने रवि बिश्नोई, दीपक चाहर और हर्षल पटेल का भी बखूबी इस्तेमाल किया।
ओपनिंग जोड़ी ने बढ़ाई चिंता
रोहित शर्मा और ईशान किशन ने इस सीरीज में भारत के लिए ओपनिंग की, लेकिन दोनों बल्लेबाज अपने कद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाए। रोहित ने अच्छी बल्लेबाजी की लेकिन किसी मैच में वे बड़ी पारी नहीं खेल पाए। वहीं किशन ने तीनों मैच में धीमी बल्लेबाजी की और रन भी नहीं बना पाए। उनका संघर्ष भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी बात है। श्रीलंका के खिलाफ किशन को लय पकड़नी होगी वरना रोहित किसी दूसरे खिलाड़ी को मौका दे सकते हैं।
खराब फील्डिंग बनी समस्या
वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भारतीय टीम की फील्डिंग बेहद खराब रही। हर मैच में भारतीय फील्डर ने कैच टपकाए और अधिकत मौकों पर मुश्किल कैच भी नहीं पकड़ सके। इसी वजह से दूसरे टी-20 मैच में विंडीज की टीम मैच में वापस भी आई थी। हालांकि, बाद में भारत ने मैच जीता, लेकिन बड़ी टीमों के खिलाफ कैच छोड़ने पर भारत को हार का सामना करना पड़ सकता है। इस कमजोरी पर रोहित और द्रविड़ के काम करना होगा।
स्पिन अटैक में विविधता की कमी
इस सीरीज में भारत ने दो लेग स्पिन गेंदबाजों को मौका दिया। चहल और बिश्नोई दोनों ने शानदार गेंदबाजी की, लेकिन दोनों ही लेग स्पिनर हैं। ऐसे में स्पिन अटैक में विवधता की कमी है। श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में जडेजा टीम के साथ जुड़ेंगे। वो बाएं हाथ के ऑफ स्पिनर हैं, लेकिन वो भी गेंद को दाएं हाथ की बल्लेबाज से दूर ले जाते हैं। ऐसे में भारत को आगे चलकर कुलदीप या वॉशिंगटन सुंदर जैसे गेंदबाजों को ज्यादा मौके देने होंगे और दोनों को तैयार करना होगा।