कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के सामने आने के बाद भारत का दक्षिण अफ्रीका दौरे काफी मुश्किलों में है। पहले दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड ने मिलकर यह दौरा 17 दिसंबर की बजाय 26 दिसंबर से शुरू किया। इसके बाद कोरोना गाइडलाइन में भी सख्ती की गई है। इस दौरे पर जाने वाले भारतीय खिलाड़ी 44 दिन तक बायो बबल (जैव सुरक्षित वातावरण) में रहेंगे। 16 दिसंबर को अफ्रीका के लिए रवाना होने से पहले सभी खिलाड़ी 12 दिसंबर को मुबंई आएंगे और यहां चार दिन तक क्वारैंटीन रहेंगे। इन खिलाड़ियों का क्वारैंटीन शुरू होने से पहले वनडे टीम का एलान होने की भी पूरी संभावना है।
12 दिसंबर को क्वारैंटीन में जाने वाले खिलाड़ी 15 जनवरी तक टेस्ट सीरीज खेलेंगे। इसके बाद वनडे सीरीज होगी और जो खिलाड़ी वनडे टीम में भी शामिल हैं, उन्हें अगले आठ दिन तक बायो बबल में ही रहना होगा। वहीं रहाणे और पुजारा जैसे खिलाड़ी 15 जनवरी के बाद बायो बबल से अलग हो सकते हैं।
इस दौरे के लिए बीसीसीआई ने 18 सदस्यीय टेस्ट टीम का एलान किया है। यह टीम 26 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच सेंचुरियन में पहला टेस्ट खेलेगी। वहीं दूसरा टेस्ट जोहानिसबर्ग में तीन से सात जनवरी के बीच खेला जाएगा। वहीं तीसरा टेस्ट 11 से 15 जनवरी के बीच केप टाउन में होगा। इसके बाद तीन वनडे मैच की सीरीज भी खेली जाएगी। पहला वनडे 19 जनवरी को पार्ल में, दूसरा वनडे 21 जनवरी को इसी मैदान में और तीसरा वनडे 23 जनवरी को केप टाउन में खेला जाएगा।
इस दौरे में भारत को एक टी-20 सीरीज भी खेलनी थी, लेकिन कोरोना की वजह से बीसीसीआई और क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर यह सीरीज बाद में खेलने का फैसला किया है।
अफ्रीका दौरे के बाद मिलेगा आराम
बीसीसीआई ने टी-20 वर्ल्डकप से पहले भारतीय खिलाड़ियों को लगातार बायो बबल में रखा था। इस वजह से खिलाड़ी थक गए थे और अच्छी तैयारी के बावजूद भारतीय टीम ग्रुप स्टेज के शुरुआती दोनों मैच हार गई थी। इस टूर्नामेंट में भारत सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंचा था। इसके बाद जसप्रीत बुमराह सहित कई खिलाड़ियों ने इस बात की शिकायत की थी। अबकी बार बीसीसीआई ने अफ्रीका दौरे के बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज लगभग दो सप्ताह बाद शुरू की है, ताकि सभी खिलाड़ी बायो बबल से बाहर अपने परिवार के साथ समय बिता सकें।