फ्रंट फुट में डिफेंस करते समय पुजारा का पिछला पैर लेग स्टंप की तरफ जाने से परेशानी हो रही है
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टीम इंडिया के अनुभवी और भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का खराब फॉर्म दक्षिण अफ्रीका में भी जारी है। पिछली तीन पारियों में पुजारा दूसरी बार शून्य पर आउट हुए हैं। उनके बल्ले से आखिरी टेस्ट शतक निकले तीन साल हो चुके हैं। लंबी पारियां खेलकर नई दीवार का नाम हासिल करने वाले पुजारा लंबे समय से रनों के लिए जूझ रहे हैं। एशियाई पिच हों या इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या फिर अफ्रीका की पिच। हर जगह पुजारा फ्लॉप रहे हैं। अधिकतर मौकों पर गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर या फील्डर के पास जा रही है।
अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में भी कुछ ऐसा ही हुआ। एनगिडी की गेंद पुजारा के बल्ले के अंदरूनी किनारे में लगकर फील्डर के पास पहुंच गई। यहां हम यह बताने की कोशिश कर रहें हैं कि उनके साथ लगातार ऐसा क्यों हो रहा है।
फ्रंट फुट डिफेंस में परेशानी
पुजारा ऐसे बल्लेबाज हैं जो फ्रंट फुट में डिफेंस करते समय पूरी तरह से आगे नहीं आते हैं। उनका पिछला पैर लेग स्टंप की तरफ जाता है, जबकि आगे वाला पैर अपनी जगह पर ही रहता है। ऐसे में उनके दोनों पैरों के बीच कैंची बन जाती है। आम बल्लेबाज ऐसी स्थिति में आसानी से एल्बीडब्लू हो जाते हैं, लेकिन पुजारा पैरों के पास अच्छा खेलते हैं और उनका आगे वाला पैर लेग स्टंप पर ही होता है। गेंद उनके पैरे में लगती भी है तो लेग स्टंप के बाहर जा रही होती है।
हालांकि पिछले पैर के स्थिर न रहने से पुजारा कई बार गेंद की पिच के करीब नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में उनके बल्ले के अंदरूनी और बाहरी दोनों किनारों में गेद लगने की संभावना बनी रहती है। पिछले कुछ समय से उनके साथ यही हो रहा है। गेंद उनके बल्ले के किनारे में लगकर करीबी फील्डर के पास जा रही है। इसी वजह से तेज गेंदबाज भी उनके खिलाफ शॉर्ट लेग का फील्डर लगाना पसंद करते हैं।
2018 के बाद से रिकॉर्ड बेहद खराब
पुजारा 2018 के बाद से 65 पारियों में 29 बार फ्रंट फुट में डिफेंस करते हुए आउट हुए हैं। दूसरा कोई भी बल्लेबाज इस दौरान फ्रंट फुट में डिफेंस करते समय इतनी बार आउट नहीं हुआ है। हालांकि फ्रंट फुट में आउट होने के मामले में जॉनी बेयरस्टो, केएल राहुल और रॉस्टन चेज का रिकॉर्ड पुजारा से भी खराब है, लेकिन ये बल्लेबाज अधिकतर मौकों पर एलबीडब्लू या बोल्ड आउट होते हैं।
धीमी पिच में मिलता है फायदा
एशिया की धीमी पिचों में पुजारा को इस शैली का फायदा मिलता है, क्योंकि गेंद में ज्यादा उछाल नहीं होता। ऐसे में गेंद उनके घुटने के आसपास आती है और किनारा लगने पर भी फील्डर के पास नहीं जाती, क्योंकि पुजारा हल्के हाथों से डिफेंस करते हैं। वहीं गेंद छोटी होने पर उनके पास बैकफुट में जाकर शॉट खेलने का मौका रहता है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया और अफीका की तेज पिचों में पुजारा की यह तकनीक उन पर भारी पड़ रही है।
रक्षात्मक शैली से खेलने का असर
पुजारा रक्षात्मक शैली के बल्लेबाज हैं और अपना समय लेकर रन बनाते हैं। वो खराब गेंद मिलने पर ही शॉट खेलते हैं और अच्छी गेंदों पर डिफेंस करना पसंद करते हैं। उनका स्वाभव बहुत ही शांत है और गेंदबाज के उकसाने पर भी वो खराब शॉट नहीं खेलते हैं। ऐसे में गेंदबाज उनसे डिफेंस में ही गलती करवाने की कोशिश करते हैं। उनका डिफेंस अच्छा है और पैरों के पास वो बहुत ही बेहतरीन तरीके से खेलते हैं इसलिए उन्हें क्लीन बोल्ड या एलबीडब्लू करना मुश्किल है। इसी वजह से वो अधिकतर मौकों पर करीबी फील्डर के हाथों कैच आउट होते हैं।
विलियमसन और बटलर का डिफेंस सबसे मजबूत
फ्रंट फुट में डिफेंस करने के मामले में केन विलियमसन और जोश बटलर सबसे आगे हैं। विलियमसन अपने करियर में सिर्फ दो बार फ्रंट फुट में डिफेंस करते हुए आउट हुए हैं। वहीं जोस बटलर तीन बार यह शॉट खेलते हुए आउट हुए हैं। इस मामले में भारत के रोहित शर्मा और रवींद्र जडेजा भी काफी आगे हैं। रोहित अपने करियर में चार बार और जडेजा दो बार फ्रंट फुट में डिफेंस करते हुए आउट हुए हैं।