पूर्व क्रिकेटर रोशन महानामा की नई किताब ने श्रीलंका की राजनीति में हलचल मचा रखी है। इस किताब में महानामा ने जो ब्योरा दिया है, उससे यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की छवि पर बहुत खराब असर पड़ने के संकेत हैं। महानामा की नई किताब- ‘माई इनिंग्स’ में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री रहते हुए विक्रमसिंघे ने श्रीलंकाई क्रिकेट में अनुचित हस्तक्षेप किया। उन्होंने लिखा है कि 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के तत्कालीन प्रमुख हेमाका अमरासुरिया को आईसीसी की बैठक में जाने से रोक दिया। उनके बदले तब तिलांगा सुमतिपाला को उस बैठक में भेज दिया गया।
श्रीलंका के प्रमुख अखबार आईलैंड के मुताबिक सुमतिपाला को 2001 में तत्कालीन राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख के पद से हटा दिया था। बताया जाता है कि सुमतिपाला को हटाने के मसले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया। इस मुद्दे पर तत्कालीन पीपुल्स एलायंस सरकार गिर गई। उसके बाद यूएनपी सत्ता में आई और विक्रमसिंघे प्रधानमंत्री बने। सुमतिपाला को आईसीसी की बैठक में भेज जाने के पीछे इसी घटनाक्रम का हाथ था। महानामा ने लिखा है कि इस रूप में सुमतिपाला ने अपने अपमान का बदला लिया।
श्रीलंका में शुरुआत से ही राजनीति और क्रिकेट का गहरा संबंध रहा है। वहां के कई कामयाब क्रिकेटर बाद में राजनीति में ऊंचे पदों पर पहुंचे हैं। श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड पर किसका दबदबा चलेगा, इसको लेकर श्रीलंकाई पार्टियों में तीखी होड़ रही है। इसीलिए महानामा की किताब में छपा ब्योरा यहां काफी चर्चित हुआ है। ‘माई इनिंग्स’ महानामा की दूसरी किताब है। लोकार्पण होने के होने के बाद इस किताब की तेजी से बिक्री हुई है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर होने के बाद रोशन महानामा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के रेफरी नियुक्त हुए थे। इस भूमिका में भी उनका लंबा अनुभव रहा। अपने इस अनुभव का भी उन्होंने अपनी नई किताब में विवरण दिया है। इसके अलावा महानामा ने श्रीलंकाई क्रिकेट की मौजूदा हालत पर भी टिप्पणियां की हैं। एक दशक पहले तक श्रीलंका की क्रिकेट टीम दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में गिनी जाती थी। लेकिन हाल के वर्षों में वह लगातार कमजोर होती चली गई है।
अखबार आईलैंड ने कहा है कि महानामा ने श्रीलंकाई क्रिकेट के मौजूदा दौर के बारे में जो लिखा है, अधिकांश क्रिकेट प्रेमी उनकी बातों से सहमत होंगे। महानामा ने लिखा है- ‘1996 के वर्ल्ड कप के बाद दो दशक से भी अधिक समय तक ज्यादातर प्रशासक सर्वोच्च पदों पर बने रहे। वे सिर्फ अपनी भूमिकाएं बदलते रहे। कोच कभी चयनकर्ता बन गए, तो कभी दूसरी भूमिका में चले गए। इससे क्रिकेट बोर्ड एक ही दिशा में चलता रहा। जबकि उसमें मूलभूत बदलाव की जरूरत है।’
गौरतलब है कि 1996 में श्रीलंका क्रिकेट का वर्ल्ड चैंपियन बना था। महानामा 1980-90 के दशकों में श्रीलंकाई टीम की तरफ से 52 टेस्ट मैच और 213 अंतरारष्ट्रीय वन डे मैच खेले। टेस्ट मैचों में उन्होंने ढाई हजार से ज्यादा और वन डे मैचों में पांच हजार से ज्यादा रन बनाए थे।