सेंचुरियन में भारत के खिलाफ मिली करारी हार के बाद दक्षिण अफ्रीका ने जोहानिसबर्ग में शानदार वापसी की और दूसरा टेस्ट सात विकेट से अपने नाम किया। इस मैच की दूसरी पारी में अफ्रीकी कप्तान डीन एल्गर ने नाबाद 96 रन बनाए और अपनी टीम को सीरीज में बराबरी पर ला खड़ा किया। इस दौरान एल्गर के शरीर में कई गेंदें लगीं और वो चोटिल भी हुए, लेकिन अपनी टीम को जीत दिलाकर ही वापस लौटे। इस मैच में 96 रन की ऐतिहासिक पारी खेलने से पहले एल्गर ने अपने पिता से कहा था कि अगर भारतीय टीम उन्हें मैदान से बाहर भेजना चाहती है तो उसे उनके शरीर का कोई हिस्सा तोड़ना होगा। इससे पहले वो मैदान नहीं छोड़ने वाले।
डीन एल्गर के पिता रिचर्ड एल्गर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अपने बेटे से जुड़ी रोचक बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि मैच के चौथे दिन जब अफ्रीका को जीत के लिए 100 से कम रन चाहिए थे, तब उन्होंने अपनी पत्नी को बताया कि डीन एल्गर इस पारी में आउट नहीं होने वाले। उस समय एल्गर पूरी तरह से लय में थे। उनकी पत्नी ने भी यही कहा कि एल्गर तो लय में हैं, लेकिन अभी अफ्रीका को 100 के करीब रन बनाने हैं। इसके जवाब में एल्गर के पिता ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। एल्गर और उनके साथी इस लक्ष्य का पीछा कर लेंगे।
एल्गर ने पिता ने यह भी बताया कि जब एल्गर अपनी पैड के पास गेंद खेलने लगते हैं तो उन्हें यह पता चल जाता है कि वो पूरी लय में हैं। जोहानिसबर्ग में उन्होंने बुमराह के ओवर में दो बार पैड के पास से गेंद खेली। इसी समय से उनके पिता को पता था कि एल्गर अपनी लय पकड़ चुके हैं।
बचपन से जिद्दी हैं एल्गर
रिचर्ड एल्गर के अनुसार उनके बेटे बचपन से जिद्दी हैं। वो पांच साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहे हैं। पहले वो अपने बड़े भाई और उनके दोस्त के साथ खेलते थे। उस समय उनके भाई उम्र में लगभग उनके दोगुने थे, लेकिन एल्गर हमेशा यही बोलते थे कि वो आउट नहीं होंगे। बचपन से जब भी गेंद उनके शरीर में लगती थी वो और ध्यान से खेलने लगते थे और उतनी ही बेहतर लय में बल्लेबाजी करने लगते थे।
बचपन से ही क्रिकेट खेलना चाहते थे डीन
डीन एल्गर बचपन से ही क्रिकेट खेलना चाहते थे। स्कूल के दिनों में भी उन्होंने अपने शिक्षकों से साफ कह दिया था कि वो अपना करियर क्रिकेट में ही आगे बढ़ाएंगे। एक दिन उनके शिक्षक उन पर होमवर्क करने का दबाव बना रहे थे। उस समय उन्होंने अपने शिक्षकों से यही कहा था कि वो यहां क्रिकेट खेलने आते हैं। कप्तानी की क्षमता से बचपने से उनके अंदर थी। उनके कोच डीन एल्गर के पिता के अच्छे दोस्त थे और एक दिन उन्होंने एल्गर के पिता से कहा था। आपका बेटा दक्षिण अफ्रीका के लिए खेलेगा और हजारों रन बनाएगा। अब यब बात सही साबित हो चुकी है।
स्क्वॉश भी खेलते हैं एल्गर
डीन एल्गर क्रिकेट के अलावा स्क्वॉश के भी अच्छे खिलाड़ी हैं। लंबे समय तक उन्होंने दोनों खेल साथ खेले, लेकिन बाद में उन्हें कोई एक खेल चुनना था और उन्होंने क्रिकेट को चुना। एल्गर के पिता भी फुटबाल के खिलाड़ी रहे हैं और वो अपनी टीम के कप्तान भी थे। ऐसे में उन्हें एल्गर को चोटिल होने से डर नहीं लगता, लेकिन उनकी मां को इस बात की चिंता रहती है।