मैच से ज्यादा विवाद की हुई चर्चा
भारत और पाकिस्तान के बीच मैच को लेकर हमेशा ही हाइप रहा है, लेकिन इस बार तो मैच की चर्चा प्रतिद्वंद्विता से ज्यादा विवाद की रही। बांग्लादेश मामले पर बीच में कूदते हुए पाकिस्तान ने दुनिया के सामने अपनी थू-थू कराई और नौ दिन की नौटंकी के बाद अपने ही फैसले पर यू-टर्न ले लिया था। भारत और पाकिस्तान की टीमें मैदान पर उतरने के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे पहले हम यहां आपको पूरे विवाद के बारे में बता रहे हैं।
आइए जानते हैं किस तरह पाकिस्तान ने गीदड़भभकी दी और विश्व कप में खलल डालने की नाकाम कोशिश की...
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आईसीसी के चाबुक से ढीले पड़ गए पाकिस्तान के तेवर
आईसीसी ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया और पाकिस्तान को संभावित कार्रवाई की चेतावनी दे दी थी। पाकिस्तान पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा था। अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ नहीं खेलता तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते और करोड़ों रुपये का जुर्माना भरना पड़ता। मामले को सुलझाने के लिए आठ फरवरी को आईसीसी के उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा के साथ पीसीबी की बैठक हुई थी। बैठक के बाद यह तय हो गया था कि पाकिस्तान यू-टर्न लेगा और इसके 24 घंटे बाद ही पाकिस्तान सरकार ने मैच खेलने का एलान कर दिया था। इन सबके बीच सवाल यही उठता है कि अगर पाकिस्तान को यू-टर्न ही लेना था तो उसने बहिष्कार का ड्रामा किया ही क्यों?