टेस्ट मैचों में भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ माने जाने वाले चेतेश्वर पुजारा को इस बात की खुशी है कि बेखौफ होकर बल्लेबाजी करने से उनकी लय लौट आई है और वह अब खुद पर गैरजरूरी दबाव नहीं डालेंगे। पुजारा ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से टेस्ट शतक नहीं बनना उनके लिए तब तक चिंता की बात नहीं है जब तक उनके बल्ले से निकले 80 और 90 रन टीम को जीत दिलाने में मदद करें।
टीम के अभ्यास सत्र के दौरान पुजारा से जब पूछा गया कि क्या इंग्लैंड के खिलाफ पिछली शृंखला में आक्रामक बल्लेबाजी से उन्हें फायदा हुआ तो उन्होंने कहा, हां, मुझे ऐसा लगता है। जब प्रदर्शन की बात आती है तो मानसिकता थोड़ी अलग थी लेकिन जब तकनीक की बात आती है तो मुझे नहीं लगता कि तकनीक में कोई बड़ा बदलाव आया है। मैं थोड़ा निडर था, जिससे मदद मिली।’
उन्होंने माना कि वह खुद पर बहुत ज्यादा दबाव बना लेते थे लेकिन लीड्स और ओवल में 91 और 61 रन की पारी खेलने के बाद चीजें बदल गईं। उन्होंने कहा, ‘आपको अपने ऊपर बहुत अधिक दबाव डालने की आवश्यकता नहीं है और जो कुछ हो रहा है उसके बारे में बहुत अधिक चिंता करने के बजाय बस कोशिश करें और मैदान में जाकर अपने खेल का आनंद लें। इंग्लैंड सीरीज के दौरान यही मानसिकता थी। अब तक तैयारी अच्छी रही है और भारतीय परिस्थितियों में खेलने के अनुभव से अगले कुछ टेस्ट मैचों में मदद मिलेगी।’
लंबे समय से नहीं लगा है शतक
पुजारा ने जनवरी 2019 के बाद से टेस्ट शतक नहीं लगाया है लेकिन उनके लिए यह कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, ‘जहां तक मेरे शतक की बात है तो जब होगा तब होगा। मेरा काम टीम के लिए अच्छी बल्लेबाजी करना है और ऐसा नहीं है कि मैं रन नहीं बना रहा हूं। मैं 80 या 90 रन की पारी खेल रहा हूं। मैं अच्छी बल्लेबाजी कर रहा हूं और टीम के लिए योगदान दे रहा हूं। मुझे अपने शतक की परवाह नहीं है। यह एक पारी की बात है।’