227 रन पर सिमटा बांग्लादेश
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश ने अच्छी शुरुआत की और पहले विकेट के लिए नजमुल हसन और जाकिर की जोड़ी ने 39 रन जोड़े। 12 साल बाद टेस्ट में वापसी करने वाले जयदेव उनादकट ने भारत को पहली सफलता दिलाई। उन्होंने जाकिर हसन को लोकेश राहुल के हाथों कैच कराया। इसके तीन गेंद बाद ही अश्विन ने शान्तो के पवेलियन भेज दिया। मोमिनुल और कप्तान शाकिब ने तीसरे विकेट के लिए 43 रन की साझेदारी की। उमेश ने शाकिब को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा। इसके बाद बांग्लादेश की टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही।
मोमिनुल एक छोर पर जमे रहे, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे। मोमिनुल ने कई बल्लेबाजों के साथ 40 रन से ज्यादा की साझेदारी की, लेकिन अर्धशतकीय साझेदारी नहीं कर सके। बांग्लादेश के लिए सबसे ज्यादा 84 रन मोमिनुल हक ने बनाए। 26 रन बनाने वाले मुश्फिकुर रहीम टीम के दूसरे सबसे सफल बल्लेबाज रहे। लिटन दास ने 25 और शान्तो ने 24 रन की पारी खेली। भारत के लिए उमेश यादव और रविचंद्रन अश्विन ने चार-चार विकेट लिए। वहीं, जयदेव उनादकट को दो विकेट मिले। अंत में बांग्लादेश की टीम 227 रन पर सिमट गई।
इसके जवाब में भारत ने पहली पारी में आठ ओवर में बिना कोई विकेट गंवाए 19 रन बना लिए हैं। लोकेश राहुल तीन और शुभमन गिल 14 रन बनाकर खेल रहे हैं। भारतीय बांग्लादेश के स्कोर से 208 रन पीछे है।
कुलदीप को बाहर करने पर बवाल
पिछले मुकाबले में भारतीय टीम को जीत दिलाने वाले कुलदीप यादव को इस मैच में टीम से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह जयदेव उनादकट को मौका मिला। कुलदीप ने पिछले मैच में शानदार प्रदर्शन किया था और प्लेयर ऑफ द मैच भी बने थे। इसके बावजूद उन्हें बाहर कर दिया गया। भारतीय टीम मैनेजमेंट के इस फैसले पर जमकर बवाल हुआ। सुनील गावस्कर से लेकर अंजुम चोपड़ा तक कई पूर्व क्रिकेटरों ने कुलदीप को बाहर करने के फैसले का विरोध किया।
12 साल बाद टेस्ट टीम में लौटे उनादकट
साल 2010 में अपने टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले जयदेव उनादकट ने 12 साल बाद अपना दूसरा टेस्ट खेला। इस मैच में उन्होंने अपने टेस्ट करियर का पहला विकेट भी लिया। उनादकट ने पहले मैच में जो टीम खेली थी। उनमें से अधिकतर खिलाड़ी संन्यास ले चुके हैं। वहीं, उस टीम में मौजूद कोई भी खिलाड़ी अब टीम इंडिया का हिस्सा नहीं है। सिर्फ ईशांत शर्मा और श्रीसंथ ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने संन्यास नहीं लिया है। उस मैच में उनादकट के साथ खेलने वाले द्रविड़ अब टीम के कोच बन चुके हैं।