एक समय था जब भारतीय बल्लेबाज स्पिन की मददगार पिचों पर खेलने में काफी दक्ष थे लेकिन हालिया वर्षों में यह देखने को आया है कि भारतीय बल्लेबाज तेज गेंदबाजों के खिलाफ ज्यादा सहज हैं जबकि धीमे गेंदबाजों के खिलाफ उन्हें मुश्किल होती है। स्पिन पिच पर पिछले दो-तीन वर्षों में रोहित शर्मा की चेपक के मैदान पर खेली गई 161 रन की पारी है, जहां शीर्ष क्रम के अन्य बल्लेबाज नहीं चल पाए थे।
गत दिसंबर में बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर टेस्ट में मेहदी हसन मिराज, शाकिब अल हसन और तैजुल इस्लाम के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों को बेहद मुश्किल हुई थी। उसके बाद रविचंद्रन अश्विन और श्रेयस अय्यर ने उबारा था। पूर्व स्पिनर मुरली कार्तिक कहते हैं कि पाटा विकेटों पर स्पिनरों को खेलना मुश्किल नहीं है लेकिन स्पिन की मददगार पिचें भारतीय बल्लेबाजों के लिए भी चुनौती बन सकती हैं। हमें यह स्वीकार करना होगा कि ऐसी पिचों पर हमारे बल्लेबाजों को भी मुश्किल होती है, जहां गेंद ज्यादा घूमती है।
तीसरे स्पिनर के लिए अक्षर-कुलदीप में होड़
जब कार्तिक से यह पूछा गया कि अक्षर पटेल और कुलदीप यादव में से कौन तीसरे स्पिनर के रूप में शामिल हो सकता है तो उन्होंने यह पिच पर निर्भर करेगा अगर पिच टर्निंग नहीं है तो कुलदीप ठीक रहेंगे और अगर गेंद दूसरे दिन से घूम रही है तो अक्षर को उतारना ज्यादा उपयुक्त होगा। पिछली चयन समिति में शामिल रहे सुनील जोशी का मानना है कि अगर भारत को सीरीज जीतनी है तो उन्हें कुलदीप को अंतिम एकादश में रखना होगा। पांच साल पहले धर्मशाला में कुलदीप ने अपने पहले टेस्ट में चार विकेट लिए थे। चोट और टीम संयोजन के कारण वह सात और टेस्ट ही खेल पाए और उनकी झोली में 34 विकेट हैं।
अक्षर पटेल ने पिछले दो वर्ष में इतने ही टेस्ट खेले हैं और 47 विकेट लिए हैं। मेरी नजर में तो अश्विन और रविंद्र जडेजा के बाद तीसरा स्पिनर अक्षर पटेल होना चहिए। पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे का भी मानना है कि अक्षर पटेल तीसरे स्पिनर हो सकते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसी पिच बनेंगी जिन पर दूसरे दिन से गेंद घूमने लगेगी। साथ ही कहा कि मुझे भरोसा है कि रोहित, चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख स्पिनर नाथन लियोन की गेंदों का अच्छे से सामना करेंगे। परांजपे के अन्य साथी देबांग गांधी भी तीसरे स्पिनर के रूप में अक्षर की पैरवी करते हैं। देबांग ने कहा कि अगर पिच ऐसी है जिस पर गेंद जल्द घुमाव लेगी तो अक्षर को लेना चाहिए क्योंकि कुलदीप ज्यादा फ्लाइट देते हैं।
2012 से होमग्राउंड पर 15 सीरीज जीत चुकी है टीम इंडिया
भारत का घरेलू धरती पर शानदार रिकॉर्ड रहा है। अपने मैदानों पर टीम इंडिया ने पिछली सीरीज 2012 यानी 11 साल पहले गंवाई थी। तब से लगातार 15 टेस्ट सीरीज जीत चुके हैं। भारत के अलावा किसी भी टीम ने घर में लगातार 10 से ज्यादा सीरीज नहीं जीती है। इस सीरीज में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप को लेकर भी भारतीय टीम के सामने चुनौती है। ऑस्ट्रेलिया मजबूत बढ़त के साथ पहले नंबर पर चल रहा है। भारत को लगातार दूसरी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के लिए चार टेस्ट मैचों की सीरीज में 3-0 या 3-1 की जीत की जरूरत होगी।