विराट कोहली और रिकी पोंटिंग
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ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेड पंडितों ने भी कोहली पर निशाना साधा
ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेड पंडितों ने भी कोहली पर ही निशाना साधा था। कोंस्टास वाले मामले के बाद रिकी पोंटिंग ने इसमें कोहली की गलती बताई थी। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व महान क्रिकेटर कैरी ओ कीफ तक ने विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा, 'कोहली ने अपना पूरा करियर सिर्फ अहंकार के बलबूते बनाया है। अब उन्होंने देखा कि एक डेब्यू कर रहा खिलाड़ी भी उनकी ही तरह बर्ताव कर रहा है तो उन्हं अच्छा नहीं लगा। मुझे लगता है कि वह मुश्किल में हैं।'
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सीईओ निक हॉकले ने भी कोहली को गलत बताया था। उन्होंने कहा, 'यह देखकर बहुत अच्छा नहीं लग रहा था, मेरा मतलब है कि आप जानते हैं कि क्रिकेट के मैदान पर शारीरिक टकराव पूरी तरह से वर्जित है, इसलिए यह बहुत अच्छा नहीं था। मुझे लगता है कि विराट ने आरोप स्वीकार करके स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी ली है।'
सिर्फ हॉकले नहीं, पोंटिंग, स्टीव वॉ जैसे दिग्गजों ने भी आईसीसी की आलोचना की थी। कोंस्टास वाले मामले में कोहली पर मैच फीस का 20 प्रतिशत जुर्माना लगा था और उन्हें एक डिमेरिट अंक दिया गया था। कोंस्टास वाले मामले के बाद ऑस्ट्रेलिया का इस तरह कोहली को निशाने पर लेना इस बात को बताता है कि वे कोहली से कितना डरे हुए हैं। इसकी शुरुआत तब ही हो गई थी जब भारतीय टीम ब्रिस्बेन से मेलबर्न पहुंची थी। मेलबर्न एयरपोर्ट पर ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार से जरा सी बातचीत को ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने तूल दिया था और कोहली की ही गलती बताई थी।
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने कोहली के लिए लिखीं आपत्तिजनक बातें
ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट पंडित समाप्त नहीं हुए थे कि ऑस्ट्रेलियाई मीडिया शुरू हो गई। वेस्ट ऑस्ट्रेलियन अखबार ने विराट के लिए 'क्लोन' (जोकर) शब्द का इस्तेमाल किया। 'द डेली टेलीग्राफ', 'कोड स्पोर्ट्स' के लिए आर्टिकल लिखने वाले ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार ने हेराल्ड सन के लिए अपने कॉलम में विराट कोहली पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा- क्रिकेट विराट कोहली की हरकतों के साथ खड़े रहने में विफल है। उन्होंने लिखा कि जो अपराध कोहली ने किया, उसके हिसाब से उन्हें मिली सजा बेहद कम है।' वहीं, एक और ऑस्ट्रेलियाई अखबार ने कोहली के मुंह में पेसिफायर ठूस दिया है। इस आर्टिकल की हेडिंग 'किंग कॉन' है। किंग शब्द का इस्तेमाल कोहली के लिए होता है, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने बदतमीजी करते हुए किंग के साथ कोंस्टास के नाम का शॉर्ट फॉर्म रखा है।
ऑस्ट्रेलिया के सेन क्रिकेट ने लिखा कि आईसीसी को अपना काम करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि एमसीजी टेस्ट ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर विराट का आखिरी टेस्ट हो। यह कोहली- कोंस्टास वाली घटना के कुछ घंटों बाद प्रकाशित किया गया था। उन्होंने लिखा, 'अगर आईसीसी अपना काम करती है, तो बॉक्सिंग डे ऑस्ट्रेलियाई धरती पर विराट कोहली का आखिरी टेस्ट होना चाहिए।' हालांकि, जुर्माने के एलान के बाद सेन क्रिकेट ने एक और आर्टिकल पब्लिश किया। इसमें लिखा था, 'आईसीसी और विश्व क्रिकेट के लिए शर्मनाक फैसला। क्या विराट कोहली को विशेष उपचार दिया गया था?'
सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने लिखा, 'सैंडपेपर-गेट स्कैंडल ने ने विराट कोहली को निलंबन से बचाया'। इस आर्टिकल में इस बात पर जोर दिया गया है कि इस स्कैंडल के बाद आईसीसी द्वारा किए गए बदलाव ने विराट को निलंबन से बचाया है। आर्टिकल मं बताया गया है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गेंद से छेड़छाड़ मामले के बाद आईसीसी आचार संहिता में बदलाव ने विराट को फायदा पहुंचाया और उन्हें प्रतिबंध से बचाया। लेख के अनुसार, घटना के बाद गेंद से छेड़छाड़ के लिए बहुत सख्त सजा का प्रावधान था और शारीरिक संपर्क को "स्तर दो" (जिसमें प्रतिबंध शामिल हो सकता है) से "स्तर एक" अपराध में स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसमें जुर्माना जैसी बहुत हल्की सजा का प्रावधान था।