दरअसल, कमिंस की लेग साइड पर शॉर्ट पिच गेंद को यशस्वी ने फाइन लेग पर खेलने की कोशिश की। वह चूके और गेंद विकेटकीपर कैरी के हाथों में गई। मैदानी अंपायर ने उन्हें नॉटआउट दिया। इसके बाद कमिंस ने डीआरएस लिया। थर्ड अंपायर शरफुदौला ने रिप्ले देखा। स्नोकोमीटर पर बल्ले और गेंद का कोई संपर्क नहीं दिखा। हालांकि, गेंद थोड़ी डिफ्लेक्ट हुई थी और थर्ड अंपायर ने इसे सबूत मानकर यशस्वी को आउट दे दिया। थर्ड अंपायर शरफुदौला ने मैदानी अंपायर को अपना फैसला बदलने कहा। इसके बाद यशस्वी नाखुश दिखे और उन्होंने मैदानी अंपायर के सामने अपनी नाराजगी भी जताई। हालांकि, मैदानी अंपायर ने उन्हें जाने कहा। मेलबर्न में मौजूद फैंस भी थर्ड अंपायर के फैसले से खुश नहीं दिखे और चीटर-चीटर से पूरा स्टेडियम गूंज उठा।
यशस्वी को आउट देने से नाखुश गावस्कर ने कहा, 'यह फैसला गलत है। थर्ड अंपायर का फैसला इसलिए गलत है क्योंकि स्निकोमीटर को सबूत मानकर ही खिलाड़ी और गेंद से संपर्क का पता किया जाता है। स्निकोमीटर में कोई हलचल न होने के बावजूद बिना किसी ठोस सबूत के फैसला बदलने को कहना साफतौर पर बेइमानी है। तकनीक से ही सबूत का पता चलता है, इसी वजह से तकनीक का इस्तेमाल होता है। किसी को डाउट है तो अंपायर हो या खिलाड़ी तकनीक से उसका पता लगाते हैं। हालांकि, इस मामले में स्निकोमीटर पर जांच के बाद अंपायर ने उसे दरकिनार किया और डिफ्लेक्शन को सबूत मानकर फैसला पलटा। ये गलत है।'
गावस्कर ने कहा, 'गेंद की दिशा में मामूली बदलाव दृष्टि भ्रम (ऑप्टिकल इल्यूजन) हो सकता है। आपने तकनीक क्यों रखी है? अगर तकनीक है, तो उसका उपयोग करना चाहिए। आप जो देखते हैं उसके आधार पर निर्णय नहीं ले सकते और तकनीक को नजरअंदाज नहीं कर सकते।'
इरफान पठान ने भी गावस्कर के फैसले पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि ठोस सबूत के बिना मैदानी अंपायर का फैसला पलटना गलत है। रवि शास्त्री ने केएल राहुल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि पर्थ में पहले टेस्ट के दौरान राहुल के साथ भी गलत हुआ था। तब राहुल के बैट और पैड के बीच संपर्क हुआ था। तभी गेंद भी बल्ले के बगल से गुजरी थी। हालांकि, बल्ले और गेंद के बीच साफ गैप दिखा था। थर्ड अंपायर ने स्निकोमीटर को सबूत मानते हुए राहुल को आउट दिया था।
साइमन टॉफेल ने कहा- आउट थे यशस्वी
हालांकि, आईसीसी एलीट पैनल के पूर्व अंपायर साइमन टॉफेल ने ‘चैनल 7’ को बताया, 'मेरे विचार में निर्णय आउट था। तीसरे अंपायर ने सही निर्णय लिया। तकनीक प्रोटोकॉल के साथ भी हम साक्ष्य देखते हैं और अगर अंपायर को लगाता है कि बल्ले से लगकर गेंद की दिशा बदली है तो इस तरह मामले को साबित करने के लिए तकनीक के किसी अन्य रूप का उपयोग करने की कोई आवश्यकता नहीं है।'
उन्होंने कहा, 'गेंद की दिशा में मामूली बदलाव भी निर्णायक साक्ष्य है। इस विशेष मामले में हमने तीसरे अंपायर से जो देखा है, वह यह है कि उन्होंने तकनीक का इस्तेमाल सहायक के रूप का उपयोग किया। चाहे जो भी कारण हो इस मामले में ऑडियो (स्निको) में ऐसा नहीं दिखा। आखिर में तीसरे अंपायर ने सही काम किया और स्पष्ट ‘डिफ्लेक्शन’ के आधार पर मैदानी अंपायर के फैसले को पलट दिया। इसलिए मेरे विचार से सही निर्णय लिया गया।'
हैरानी की बात तो यह रही कि यशस्वी के विकेट के बाद आकाश दीप को स्निकोमीटर को ही सबूत मानकर तीसरे अंपायर ने फैसला सुनाया। आकाश सात रन बनाकर आउट हुए। बोलैंड की गेंद उनके पैड से लगकर हेड के हाथों में गई। फील्ड अंपायर ने आकाश को आउट नहीं दिया। इसके बाद कमिंस ने रिव्यू लिया और इस बार तीसरे अंपायर ने स्निकोमीटर का हवाला देते हुए कहा कि गेंद आकाश के बल्ले का किनारा लेकर पैड पर लगी थी और फिर हेड के हाथों में गई थी। मेलबर्न में 340 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की दूसरी पारी 155 रन पर सिमट गई।