U-19 World Cup Controversy: टी20 विश्व कप 2026 को लेकर आईसीसी से टकराव के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) एक बार फिर आईसीसी के खिलाफ मुखर हो गया है। इस बार मामला अंडर-19 विश्व कप से जुड़ा है। टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद बीसीबी ने आईसीसी पर अनुचित और पक्षपातपूर्ण शेड्यूलिंग का आरोप लगाया है।
टी20 विश्व कप 2026 से पहले ड्रामा करके बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) का मन नहीं भरा था, अब उन्होंने अंडर-19 विश्व कप में भी नया क्लेश करने की ठान ली है। भले ही उनकी अंडर-19 टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई है, लेकिन बीसीबी ने नए बयान से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) पर अनुचित कार्यक्रम का आरोप लगाया है।
हबीबुल बशर का आईसीसी पर क्या है आरोप?
बीसीबी के गेम डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटर हबीबुल बशर ने कहा कि टीम की हार के पीछे केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि खिलाड़ियों पर डाले गए अत्यधिक यात्रा दबाव की भी बड़ी भूमिका रही। उन्होंने स्वीकार किया कि इंग्लैंड और भारत के खिलाफ मुकाबलों में रणनीतिक चूक रही, लेकिन साथ ही यात्रा कार्यक्रम को अनुचित बताया। हबीबुल बशर ने डेली स्टार से बातचीत में कहा, 'लोग इसे बहाना कह सकते हैं, लेकिन यात्रा कार्यक्रम ऐसा था कि खिलाड़ियों पर बेवजह का शारीरिक और मानसिक दबाव पड़ा।'
बार-बार बदला गया कार्यक्रम, बढ़ी परेशानी
बांग्लादेश की अंडर-19 टीम को शुरुआत में मसविंगो में दो वॉर्म-अप मैच खेलने थे, जिसके बाद उन्हें मुख्य मुकाबलों के लिए हरारे जाना था। लेकिन टूर्नामेंट से ठीक पहले आईसीसी ने कार्यक्रम बदल दिया। इसके बाद टीम को दो अलग-अलग शहरों में अभ्यास मैच खेलने पड़े, जिनके बीच करीब चार घंटे की दूरी थी। बशर ने कहा,' भारत के खिलाफ मैच से पहले खिलाड़ियों को थकान से बचाने के लिए बीसीबी को अपनी जेब से आंतरिक फ्लाइट का इंतजाम करना पड़ा, क्योंकि बस यात्रा लंबी और थकाने वाली थी।'
नौ घंटे का बस से सफर और मानसून की मार
बांग्लादेश के हेड कोच नवीद नवाज और कई खिलाड़ियों ने भी यात्रा व्यवस्था पर नाराजगी जताई। टीम को हरारे से बुलावायो तक मानसून के दौरान लगभग नौ घंटे का बस सफर करना पड़ा, जो उनके शुरुआती ग्रुप मैच से ठीक पहले था।भारत और न्यूजीलैंड के खिलाफ अहम मुकाबलों के लिए भी बीसीबी ने खुद खर्च उठाकर फ्लाइट की व्यवस्था की। इसके बावजूद टीम को अमेरिका के खिलाफ मैच के लिए फिर से बस से बुलावायो जाना पड़ा और उसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ सुपर सिक्स मुकाबले के लिए दोबारा लंबी यात्रा करनी पड़ी।
बड़े देशों को मिला फायदा?
हबीबुल बशर का आरोप है कि भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों को तुलनात्मक रूप से काफी हल्का यात्रा कार्यक्रम दिया गया, जबकि बांग्लादेश को लगातार शहर बदलने पड़े। उन्होंने कहा, 'हमने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही आईसीसी को यात्रा के बोझ के बारे में बताया था और अभ्यास मैचों में बदलाव की मांग की थी, लेकिन हमारी बात नहीं सुनी गई। टूर्नामेंट शुरू होने के बाद कुछ बदलना संभव नहीं होता।'