आधी रात को बनारस के घाट पर गूंजा दिल छू लेने वाला नगमा
- फोटो : @priyamalviya
Viral Video: काशी, बनारस या वाराणसी, हर नाम में सुंदरता झलकती है। बनारस को घाटों का शहर भी कहा जाता है। यहां करीब 84 घाट हैं। बताया जाता है कि बनारस अकेला शहर है जहां इतने घाट हैं। बनारस के घाटों पर होने वाली गंगा आरती एक अत्यंत भव्य, दिव्य और संगीतमय आध्यात्मिक अनुभव है। वहीं ये शहर रात होते ही एक अलग ही रंग में डूब जाता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है। वीडियो में बनारस के एक मशहूर घाट पर कुछ लोग शांति से बैठे गजल गा रहे हैं। गजल गाने वालों की आवाज में न कोई बनावटीपन है, न कोई दिखावा, बस एक सच्चा एहसास है, जो सीधे दिल तक पहुंच जाता है। गजल के बोल सुनते हुए ऐसा महसूस होता है, मानो कोई अपनी अधूरी मोहब्बत की कहानी सुना रहा हो।
वायरल वीडियो में बनारस के एक मशहूर घाट पर रात करीब 12 बजे का माहौल दिखाया गया है। न कोई चकाचौंध, न ही कोई भारी भीड़, बस कुछ लोग शांति से बैठे गजल गा रहे हैं। वीडियो में गजल की जो लाइन गाई जा रही हैं, वो हैं- 'तेरी आंखों के दरिया का उतरना भी जरूरी था'। राहत फतेह अली खान द्वारा गाए गए इस गजल-नुमा गाने में मोहब्बत का होना और अंत में बिछड़ना, दोनों ही भावनाओं को जरूरी बताया गया है। दर्द, तन्हाई और टूटे रिश्तों की टीस इन शब्दों में साफ झलकती है। गजल गाने वालों की आवाज में न कोई बनावटीपन है, न कोई दिखावा. बस सच्चा एहसास है, जो सीधे दिल तक पहुंच जाता है।
वीडियो की सबसे बड़ी खूबी उसकी सादगी है। वहां न कोई मंच है, न माइक और न लाइटें, सिर्फ अंधेरी रात है। गंगा की हल्की-हल्की आवाज और कुछ लोग जो पूरे मन से गजल में डूबे हुए हैं। ऐसा लगता है जैसे वक्त कुछ देर के लिए थम सा गया हो। वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम @priyamalviya नाम की आईडी पर शेयर किया गया है। वीडियो को अब तक काफी लोग देख चुके हैं। तो वहीं वीडियो ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बनारस सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक एहसास है, जो गंगा की लहरों में बहता है। यह एक ऐसा शहर है जो आपको अपनेपन के साथ अपनी संस्कृति में ढाल लेता है और एक गहरी छाप छोड़ जाता है।