विश्व क्रिकेट की नियामक संस्था आईसीसी अपने सबसे पुराने खेल प्रारूप को बचाने के लिए लगातार प्रयासरत है और वह इसके लिए एक अनोखी योजना बना रही है।
टेस्ट क्रिकेट के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए आईसीसी टेस्ट टीमों को उनके प्रदर्शन के आधार पर दो श्रेणियों में बांटने
पर विचार कर रही है।
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इस योजना के तहत अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों का दर्जा बढ़ा दिया जाएगा जबकि खराब प्रदर्शन करने वाली टीमों का दर्जा घटा दिया जाएगा। आईसीसी के कार्यकारी बोर्ड की इस महीने के अंत में बैठक होनी है।
खटाई में टेस्ट चैंपियनशिप
माना जा रहा है कि इसमें विश्व टेस्ट क्रिकेट चैंपियनशिप की योजना को तिलांजलि देने की घोषणा की जा सकती है। इस चैंपियनशिप को 2013 में शुरू होना था लेकिन इसे पिछले साल अक्तूबर में 2017 तक के लिए टाल दिया गया था।
प्रसारकों ने इस चैंपियनशिप में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है और न ही इसके प्रारूप पर अभी तक कोई बात बन पाई है।
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ऐसा माना जा रहा है कि दुनिया के क्रिकेट बोर्ड भी आईसीसी की प्रमोशन/रेलिगेशन योजना को मंजूरी दे सकते हैं। इससे आयरलैंड और अफगानिस्तान जैसी टीमों को टेस्ट खेलने का मौका मिल सकता है जबकि जिम्बाब्वे और बांग्लादेश से यह दर्जा छिन सकता है।
माना जा रहा है कि आईसीसी के मौजूदा पूर्णकालिक सदस्यों से टेस्ट का दर्जा नहीं छीना जाएगा लेकिन एसोसिएट सदस्य निचले रैंक के पूर्णकालिक सदस्यों के खिलाफ अपने प्रदर्शन के आधार पर टेस्ट टीम का दर्जा पा सकते हैं।
नहीं छीनेगा टेस्ट टीम का दर्जा
इससे टेस्ट में अपना प्रदर्शन सुधारने में लगी निचले रैंक की टीमों को मदद मिलेगी और एसोसिएट टीमों को भी टेस्ट खेलने का मौका मिलेगा। टीमों का प्रमोशन और रेलिगेशन कैसे किया जाएगा इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है।
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लेकिन माना जा रहा है कि टेस्ट दर्जे के लिए हर चार साल में एक प्लेऑफ टूर्नामेंट के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। प्रमोशन और रेलिगेशन के अलावा आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक पोजीशन पाने वाली टीम को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है।
अभी वार्षिक आधार पर नंबर वन टीम को टेस्ट चैंपियनशिप की गदा दी जाती है। साथ ही टीमों के एक दूसरे के खिलाफ नियमित आधार पर खेलने की अनिवार्यता में भी छूट दी जा सकती है। आईसीसी वनडे में पहले ही प्रमोशन और रेलिगेशन की योजना को हरी झंडी दे चुकी है। यह योजना 2019 के वर्ल्ड कप के बाद अस्तित्व में आएगी।