अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड रिचर्डसन ने फिक्सिंग के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि फिक्सिंग का जाल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा घरेलू टी20 टूर्नामेंट तक पहुंच गया है। रिचर्डसन ने एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में फिक्सिंग में लिप्त अंपायरों को दिखाए जाने का जिक्र किया। साथ ही कहा कि कि इस खुलासे से साफ होता है कि क्रिकेट में भ्रष्टाचार अपनी जड़े काफी गहराई तक जमा चुका है।
रिचर्डसन ने कहा कि फिक्सिंग को रोकने के लिए आईसीसी कड़ी नीतियों का सहारा ले रही है। इस कारण बुकीज अब फिक्सिंग का जाल बुनने के लिए घरेलू टी20 टूर्नामेंटों पर अपना निशाना साध रहे हैं। हाल ही में आईसीसी के सीईओ का पदभार संभालने वाले रिचर्डसन ने कहा कि आईसीसी क्रिकेट से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसके अलावा इसकी भ्रष्टाचार विरोधी ईकाइ को और सशक्त बनाने के लिए भी नियम बनाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सुरक्षा बढ़ाए जाने, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को फिक्सिंग को लेकर दी जा रही शिक्षा, भ्रष्टाचार निरोधी एवं सुरक्षा ईकाइ, एसीएसयू का गठन इसका सबूत हैं और इसी कारण से अब बुकीज के लिए बड़े टूर्नामेंटों या खिलाड़ियों तक पहुंचना मुश्किल हुआ है जिसके कारण वह घरेलू लीग मैचों को अपना निशाना बना रहे हैं।
इंग्लैंड में अगले वर्ष होने वाली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का अनावरण करने के दौरान रिचर्डसन ने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर आईसीसी इतना सख्त हो चुका है कि दुर्भाग्यवश अब ग्राउंडमेन से लेकर क्यूरेटर तक पर कड़ी नजर रखी जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाहे द्विपक्षीय सीरीज हो या फिर कोई आईसीसी इवेंट सभी पर ध्यान रखा जाता है।
उल्लेखनीय है कि एक निजी भारतीय चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन में पाकिस्तान के दो अंपायरों अनीस सिद्दकी और नदीम गौहरी, बंगलादेश के नादिर शाह और श्रीलंका के गैमिनि दिसानायाके, मौरिस विंसन और सगारा गैलागे को फिक्सिंग करते हुए दिखाया था। सभी आरोपी अंपायर हाल में संपन्न विश्वकप टी20 में अहम जानकारी मुहैया कराते हुए दिखाए गए थे। इसके बाद आईसीसी मामले की जांच कर रहा है। लेकिन मामले के प्रकाश में आने के बाद एक बार फिर से क्रिकेट में व्याप्त भ्रष्टाचार और आईसीसी की इसे लेकर तैयारियों पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।