1998 में ढाका में पाकिस्तान ने भारत को 315 रनों का 'अजेय' लक्ष्य दिया, इसके बाद इस ऐतिहासिक मैच में विजयी चौका लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज ने संन्यास ले लिया है। बाएं हाथ के बल्लेबाज ऋषिकेष कानितकर ने अब क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। वह भविष्य में कोचिंग की ओर ध्यान देना चाहते हैं।
40 वर्षीय कानितकर ने संन्यास संबंधी जानकारी बुधवार को बीसीसीआई को दे दी थी। कानितकर ने भारत की ओर से दो टेस्ट और 34 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर तीन वर्ष का रहा है। वह सन 2000 में टीम इंडिया से बाहर हुए फिर दुबारा जगह नहीं बना सके।
पुणे में जन्में कानितकर ने कहा कि क्रिकेट से अलविदा कहने की मुख्य वजह क्षेत्ररक्षण था। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी करने का जूनुन तो उनमें अभी भी है लेकिन लंबे समय तक मैदान पर क्षेत्ररक्षण करना अब शायद मुश्किल है।
बकौल कानितकर, "मैं क्षेत्ररक्षण केवल दिखावे के लिए नहीं करना चाहता। मैदान पर यदि मैं किसी युवा क्षेत्ररक्षक जैसे क्षेत्ररक्षण नहीं कर सकता तो मुझे लगता है कि मुझे अपने क्रिकेट करियर को आगे नहीं ले जाना चाहिए, इसलिए मैंने संन्यास की घोषणा की है।"
कोचिंग के बारे में उन्होंने कहा, "मेरा ध्यान कोचिंग की ओर है। यदि मुझे इसमें मौका मिलता है तो यह मेरे लिए सीखने का अच्छा मौका होगा।"