लेकिन तीसरे टेस्ट में कोहली के बल्ले ने फिर कमाल दिखाया और इस बार उन्हें दूसरे बल्लेबाजों का भी साथ मिला। संयोग से इस बार भी दोनों पारियों में उन्होंने 200 रन बनाए। पहली पारी में 97 रन और दूसरी में 103 रन।
साल 2014 वाली टेस्ट सिरीज में विराट कोहली का बल्ला खामोश रहा था और उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। कप्तान रन बना रहे हैं और वो भी आक्रामक अंदाज में। सिरीज के तीन टेस्ट में खेली छह पारियों में कोहली ने अब तक कुल 440 रन बनाए हैं।
अब तक इस सिरीज में रन बनाने के मामले में वो सबसे आगे हैं। उनके नाम दो शतक और दो अर्द्धशतक हैं और औसत है 73.33 स्ट्राइक रेट है 58.43 का, नॉटिंघम टेस्ट की पहली पारी में कोहली के 97 रन और अजिंक्ये रहाणे के 81 रनों की बदौलत भारतीय टीम 329 रनों के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंची थी। इस पारी में हार्दिक पंड्या के बल्ले ने निराश किया। उन्होंने महज 18 रन बनाए।
लेकिन किसी भी मैच में पंड्या से ध्यान हटाना आसान नहीं है। बल्ले ने उनका साथ नहीं दिया तो गेंद उनके साथ हो गई। इंग्लैंड की पहली पारी में हार्दिक पंड्या ने महज छह ओवर डाले और पांच विकेट लेकर मैच की शक्ल ही बदल दी।
ज्यादा तेज रफ्तार न होने के बावजूद पंड्या ने लाइन-लेंग्थ के बूते अंग्रेज बल्लेबाजों का जीना मुहाल कर दिया। वो क्रीज संभालते, गेंद बल्ले का किनारा चूमती और पीछे विकेटकीपर या स्लिप फील्डर के हाथों में समा जाती।
ये किसी भी टेस्ट में पंड्या की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी है। इसके बाद भारतीय टीम की दूसरी पारी में तेज खेलते हुए उन्होंने 52 रन बनाए और भारत का कुल स्कोर 500 के पार चला गया। इस बीच उन्होंने ये भी कहा कि कपिल देव से उनकी तुलना बेमानी है। वो हार्दिक पंड्या हैं और वही रहना चाहते हैं।
इस सिरीज में अब तक भारतीय टीम इसलिए हार रही थी क्योंकि ऊपरी क्रम नई गेंद की चमक उतार नहीं पा रहा था और मध्यक्रम को स्विंग गेंदों के सामने परेशानी हो रही थी। लेकिन नॉटिंघम टेस्ट में ऐसा नहीं हुआ। टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाजों ने पहली पारी के बाद दूसरी पारी में सधी हुई शुरुआत की। शिखर धवन ने 63 गेंदों में 44 रन और के एल राहुल ने 33 गेंदों में 36 रन बनाए। पहली विकेट गिरी 60 पर और दूसरी 111 रनों पर।
सलामी बल्लेबाजों से अलग चेतेश्वर पुजारा ने भी दूसरी पारी में बढ़िया हाथ दिखाए और 208 गेंद खेलकर 72 रन बनाए। शुरुआती तीन बल्लेबाजों के बढ़िया खेल दिखाने के भरोसे टीम इंडिया ने सुनिश्चित किया कि इंग्लैंड के सामने ऐसा लक्ष्य रखा जाए, जिस तक पहुंचना उसके लिए मुश्किल हो जाए।
जाहिर है, इस मैच में भारतीय टीम जीत तक इसलिए पहुंच सकी क्योंकि कोहली के अलावा दूसरे बल्लेबाजों ने भी अपने विकेट आसानी से नहीं दिए। स्विंग होती गेंदों को लीव किया गया और कमजोर गेंदों पर प्रहार भी।
कहते हैं कि बल्लेबाज को रन बनाने के लिए कई अच्छे शॉट की जरूरत होती है और गेंदबाज को विकेट चटकाने के लिए सिर्फ एक अच्छी गेंद चाहिए होती है। लेकिन यही एक गेंद कभी-कभी काफी देर लगा देती है।
दूसरी पारी में इंग्लैंड की टीम 521 रनों के नामुमकिन लक्ष्य का पीछा कर रही थी और मक़सद मैच बचाना था। पहले इशांत शर्मा और फिर मोहम्मद शामी ने टीम इंडिया को बढ़िया शुरुआत दिलाई। इंग्लैंड के चार विकेट 62 रन पर गिर गए थे और लग रहा था कि मैच चाय तक खत्म हो जाएगा।
लेकिन इसके बाद जोस बटलर (106) और बेन स्टोक्स (62) के बीच लंबी साझेदारी हुई। दोनों ने मिलकर 363 गेंद खेली। फिर पारी के 80 ओवर पूरे होने के बाद गई गेंद मिली और बुमराह ने दिखाया कि वो इतने खतरनाक क्यों हैं।
पहले उन्होंने तेजी से अंदर आती गेंद पर बटलर को पगबाधा आउट किया और अगली ही गेंद पर बेयरस्टो को मिलती-जुलती गेंद पर बोल्ड कर पवेलियन लौटाया। बुमराह ने इस मैच में 85 रन देकर पांच विकेट झटके। और सबसे जरूरी ये है कि बटलर और स्टोक्स की खतरनाक होती जोड़ी को तोड़ा।
विराट कोहली की बल्लेबाजी और हार्दिक-बुमराह की गेंदबाजी से अलग इस मैच में भारतीय टीम की फील्डिंग, खास तौर पर विकेट के पीछे कैचिंग ने काफी निगाहें खींचीं। अक्सर ऐसा होता है कि गेंदबाज अच्छी गेंद डाले, बल्ले का किनारा भी लगे, लेकिन कैच टपका दी जाएं।
इससे ना केवल बॉलर बल्कि पूरी टीम का हौसला जाता रहता है। लेकिन टीम इंडिया ने नॉटिंघम टेस्ट में इस मामले में कोई चूक नहीं की। बल्ले का किनारा लेकर पीछे जाने वाली गेंदों को विकेटकीपर और फील्डरों ने लपकने में जरा गलती नहीं की।
यूं तो पूरे मैच में कुछ मौकों को छोड़ दिया जाए तो पूरी भारतीय टीम की फील्डिंग अच्छी रही, लेकिन खास तौर से विकेटकीपर ऋषभ पंत और स्लिप में खड़े के एल राहुल की तारीफ करनी होगी। पंत ने पहली पारी में पांच कैच लपके जिनमें से कुछ वाकई मुश्किल थे। इसके अलावा राहुल ने दोनों पारियों में मिलाकर छह कैच पकड़े।
साभार: बीबीसी