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अब क्रिकेट पिच भी कोरोना वायरस से 'संक्रमित', लॉकडाउन बना 'जान' का दुश्मन

Fri, 22 May 2020 03:10 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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इस तरह तैयार होती है पिच (ग्राफिक्स रोहित झा) - फोटो : अमर उजाला
क्रिकेट पिच यानी 22 गज की वह पट्टी जहां गेंद और बल्ले के बीच घमासान होता है। 20.12 मीटर लंबा और 10 फीट (3.05 मी) चौड़ाई का यह आयताकार क्षेत्र कोरोना वायरस की वजह से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जी हां, सुनने में यह जरूर अटपटा लगेगा, लेकिन सच्चाई यही है, कोविड-19 न सिर्फ लोगों की जान का दुश्मन बना हुआ है बल्कि क्रिकेट मैदानों की इस अहम सतह को भी प्रभावित कर रहा है। दरअसल, जून में मानसून के आगमन से पहले देश के सभी इंटरनेशनल स्टेडिमय की खासतौर पर देखभाल की जाती है। पिच को खाद, उर्वरक और विशेष प्रकार की मिट्टी से सहेजा जाता है। यह 10 दिन की प्रक्रिया होती है, जिससे पिछले सीजन में लगातार इस्तेमाल की वजह से थक चुकी पिच को नई जान मिलती है। मगर अब देशभर में जारी लॉकडाउन की वजह से यह कार्य छह माह के लिए टल चुका है।
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दलजीत सिंह - फोटो : social media

...तो धीरे-धीरे धीमी हो जाएगी पिच


प्रथम श्रेणी विकेटकीपर रह चुके BCCI के पूर्व मुख्य पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह कहते हैं कि, 'पिछले 10 वर्षों से, हमारे पास क्यूरेटर के लिए पाठ्यक्रम हैं, इसमें हम उन्हें ऑफ-सीजन रेनोवेशन (पुर्ननिर्माण) सिखाते हैं। आप पूरे साल जिस पिच पर खेलते हैं, उसे सहेजना जरूरी होता है, क्योंकि सीजन के अंत तक विकेट खराब हो जाता है। घास में जान नहीं बचती। पिच पर मौजूद जैविक पदार्थ अंदर चले जाते हैं। हमें अगले सत्र के लिए पिच की खास देखभाल करनी थी। यदि हम मानसून से पहले करते तो बारिश के दौरान पिच पर नई घास उग जाती। यदि इस बार ऐसा नहीं हो पाया तो अगले साल आपकी सभी पिच धीरे-धीरे धीमी होती चलीं जाएंगी। मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के चीफ क्यूरेटर समंदर सिंह चौहान पूरी प्रक्रिया की तुलना सैलून जाने से करते हैं। 'जिस तरह आप ब्यूटी पार्लर जाकर खुद को संवारते हैं। बाल कटवाते हैं, दाढ़ी की छटाई करवाते हैं। ठीक उसी तरह पिच की सेहत और सुंदरता के लिए यह जरूरी है।'
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ईडन गार्डन्स पिच - फोटो : सोशल मीडिया

मिट्टी की आपूर्ति अटक गई

 
मई के मध्य में, मुंबई के मैदान और जिमखानों में लेटराइट मिट्टी को डंप करने वाले ट्रक आना शुरू हो जाते हैं, जो पिच के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसके लिए मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) अप्रैल के अंत तक आदेश दे देता था और आमतौर पर मई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में आपूर्ति हो जाती थी, जो मुंबई से लगभग 54 किमी दूर पड़घा गांव से आती है। मगर मुंबई की गिनती कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित शहरों में हो रही है, इसलिए इस समय मिट्टी की आपूर्ति संभव नहीं है। एमसीए अपेक्स काउंसिल के सदस्य नदीम मेमन ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि मिट्टी लाने के लिए कोई ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है और गांव वाले भी अपने इलाके में किसी गाड़ी को आने की अनुमति नहीं दे रहे हैं, इसके साथ ही स्टाफ की भी परेशानी है। अब जो काम आवश्यक रूप से मानसून से पहले होता था, मजबूरन बाद में करना होगा।
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- फोटो : सोशल मीडिया

लॉकडाउन की वजह से मजदूरों की दिक्कत

 
ऐसा नहीं है कि स्टेडियम प्रबंधन के पास सिर्फ मिट्टी ही एक समस्या है। वानखेड़े स्टेडियम के क्यूरेटर रमेश ममुनकर बताते हैं कि उनके पास अगले एक-दो साल तक के लिए पर्याप्त मिट्टी है, लेकिन इस काम को करने के लिए मजदूरों की दिक्कत है। मुंबई रेड जोन में आता है ऐसे में कर्मचारी स्टेडियम तक नहीं पहुंच पा रहे। ममुनकर की माने तो उन्हें 17 मई के बाद अपने कर्मचारियों को वापस पाने की उम्मीद की थी, और मानसून के जून के मध्य में आने से पहले यह काम भी खत्म हो जाना था, लेकिन 31 मई तक लॉकडाउन के विस्तार के बाद, काम टल गया। वानखेड़े के 14 सदस्यीय कर्मचारियों के स्टाफ में से अधिकांश दूर के उपनगरों में रहते हैं।
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