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क्या बॉल टैम्परिंग कर मैच जीता जा सकता है, कैसे मिलता है फायदा

Tue, 27 Mar 2018 08:09 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
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बॉल टेंपरिंग - फोटो : file
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क्रिकेट की दुनिया में इन दिनों तूफान मचा है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जारी टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के एक खिलाड़ी ने पहले तो गेंद से छेड़छाड़ की और बाद में टीम के कप्तान ने भी माना कि यह सबकुछ योजना बनाकर किया गया था। इस हरकत से 'क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया' सकते में आ गया। अब स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर पर खतरे की तलवार लटक रही है।

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कुछ लोग ये भी कह रहे हैं स्मिथ पर एक टेस्ट मैच का बैन और पूरी मैच फीस का जुर्माना काफी नहीं है। उनका यह भी कहना है कि सजा की तुलना में उनका गुनाह काफी बड़ा है।

लेकिन ऐसा नहीं है कि क्रिकेट की गेंद से पहली बार छेड़छाड़ की गई है या करने की कोशिश की गई है। कभी चुइंग गम, कभी सैंडपेपर (रेगमाल जैसी चीज), कभी मुंह से छीलना और कभी जिप पर रगड़ना, कई खिलाड़ी अतीत में भी इस तरह की हरकत कर चुके हैं।

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क्या हैं नियम-कानून?

बॉल टेंपरिंग - फोटो : file
लेकिन खिलाड़ी ऐसा क्यों करते हैं? गेंद से छेड़छाड़ क्यों की जाती है? क्या इससे फील्डिंग करने वाली टीम को फायदा पहुंचता है? क्या ये छेड़छाड़ टीम को जीत तक पहुंचा सकती है?

क्रिकेट को सिर्फ नियमों के दायरे में रहकर नहीं खेला जाता बल्कि खेल के कानूनों के मुताबिक इसे खेल भावना के साथ खेलना होता है। दूसरे खेलों की तरह क्रिकेट ने भी अपने नियम खुद बनाए हैं। नेशनल असोसिएशन और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) पर इन नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी होती है।

नियमों की सूची में बिंदु 41.3 के मुताबिक मैच बॉल से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए। ये गुनाह है और खेल भावना के खिलाफ भी। वहीं, नियम 41.3.2 में साफ तौर पर लिखा गया है, ''कोई भी खिलाड़ी अगर गेंद को बदलने या उससे छेड़छाड़ की कोशिश करता है तो ये अपराध है।''

बॉल से खिलवाड़ क्यों किया जाता है?

बॉल टेंपरिंग - फोटो : file
लेकिन सवाल ये भी उठता है कि बॉल की कंडिशन को लेकर इतना संजीदा क्यों रहा जाता है? ऐसा क्या है कि गेंद में जरा सा बदलाव आते ही एक टीम विशेष को नाजायज फायदा मिल सकता है? दरअसल, बॉल को स्विंग कराना क्रिकेट की एक ऐसी कला है जो हर टीम चाहती है। अगर गेंद स्विंग हो रही हो तो बल्लेबाज के लिए उसे खेलना काफी मुश्किल हो जाता है।

स्विंग के मायने हैं गेंद की चाल और दिशा में बदलाव होना
इससे भी ज्यादा खतरनाक है रिवर्स स्विंग। दरअसल, आपने गौर किया होगा कि खिलाड़ी गेंद को लगातार रगड़ते रहते हैं। वो ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि गेंद का आधा हिस्सा पुराना होता है, जबकि दूसरे वाले हिस्से को नया बनाए रखने की कोशिश होती है।

जब गेंद काफी पुरानी हो जाती है तो वो चमक वाली साइड की तरफ स्विंग होनी शुरू हो जाती है। इसे रिवर्स स्विंग कहते हैं। इसमें आउटस्विंगर गेंद इनस्विंगर बन जाती है और इनस्विंगर, आउटस्विंगर।
 
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...तो ये फायदा कैसे पहुंचाती है?

बॉल टेंपरिंग - फोटो : file
खिलाड़ी जानबूझकर एक साइड को खुरदरा बनाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए गेंद को बार-बार पिच पर पटका जाता है। दूसरी तरफ वाली साइड चमकाने के लिए थूक का इस्तेमाल किया जाता है।

तेज गेंदबाजों के लिए नई गेंद से विकेट लेना आसान होता है। पिच पर पटकने से उछाल आता है और नई गेंद वैसे भी स्विंग लेती है। लेकिन जिन पिचों पर स्पिन गेंदबाजों को मदद न मिल रही हो, वहां गेंदबाजों को विकेट लेने के लिए रिवर्स स्विंग की जरूरत होती है।

जब गेंद रिवर्स स्विंग होती है तो बल्लेबाज के लिए उसे पढ़ना और मुश्किल होता है। गेंद हवा में दिशा बदलती है, ऐसे में उसका अंदाजा लगाना और मुश्किल हो जाता है। पाकिस्तान के इमरान खान और वसीम अकरम इसके बादशाह माने जाते हैं। और जब गेंद स्विंग या रिवर्स स्विंग होती है तो बल्लेबाजों के लिए रन बनाना ही नहीं बल्कि विकेट बचा पाना बड़ा मुश्किल होता है।

ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ का कहना था कि वो हताशा में ये गलती कर बैठे। ज़ाहिर है, उन्हें ऐसा लग रहा था कि अगर गेंद रिवर्स स्विंग करती तो उन्हें मैच में लौटने का मौका मिल सकता था।
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