हॉटस्पॉट तकनीक के आविष्कारकों ने कहा है कि इस तकनीक से सटीक परिणाम हासिल करने के लिए बल्लों पर से सभी तरह के बाहरी आवरण हटाने की जरूरत है।
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की बीच चल रही एशेज सीरीज में कई ऐसे मामले आए हैं जब हॉटस्पॉट तकनीक अपना काम करने में नाकाम रही है। कई खिलाड़ियों पर आरोप लग रहे हैं वे बल्ले पर सिलिकान टेप लगा रहे हैं ताकि हॉटस्पॉट को चकमा दे सकें।
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हॉटस्पॉट तकनीक के आविष्कारक वारेन ब्रेनन ने एक बयान में कहा, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि बल्ले पर लगाए जाने वाले आवरणों से हॉटस्पॉट तकनीक में थर्मल सिग्नेचर प्रभावित होता है। इस तकनीक से सटीक परिणाम हासिल करने के लिए बल्लों से आवरणों को हटाए जाने की जरूरत है।’ हॉटस्पॉट तकनीक की आलोचना होने के बाद ब्रेनन का बयान पहली बार आया है।
हॉटस्पॉट तकनीक बनाने वाली बीबीजी स्पोर्ट्स ने पिछले दिनों क्रिकेट बैटों का कई तरह से प्रयोग किया और इसके बाद कंपनी ने पाया कि बल्लों पर लगे बाहरी आवरण हॉटस्पॉट तकनीक को प्रभावित कर रहे हैं।
इससे पहले, ऑस्ट्रेलिया के चैनल नाइन ने दावा किया था कि एशेज सीरीज में खिलाड़ी बल्लों पर सिलिकान टेप लगा रहे हैं। स्टार बल्लेबाज केविन पीटरसन समेत इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के कई खिलाड़ियों पर ये आरोप लगा है।
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हालांकि पीटरसन ने इस मामले में अपना नाम घसीटे जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने चैनल नाइन के इस दावे का खंडन करते हुए उसे माफी मांगने को कहा है।
वहीं चैनल नाइन ने भी इस मामले पर माफी मांगने से इनकार कर दिया था।