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सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी: भारतीय क्रिकेट को रफ्तार देने वाला देसी IPL, जानिए सबकुछ

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सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी - फोटो : अमर उजाला
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एक जमाना था जब भारत में क्रिकेट में न तो पैसा था और न ही प्रचार-प्रसार। खिलाड़ियों को पारिश्रामिक भी आयोजन स्थल पर मिलता था। कभी-कभी तो रेजगी की पोटलियां दी जाती थीं। 75 या 100 रुपये और वह भी रेजगी में। यदि आमदनी छोटे सिक्कों में होती थी तो भुगतान भी छोटे सिक्कों में ही होता था। मुश्ताक अली व विजय हजारे अक्सर कहा करते थे कि किस तरह उन्हें वह रकम मुश्किल से संभाल कर पास रखनी होती थी।

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विज्ञापन आदि से अतिरिक्त आमदनी का तो सवाल ही नहीं था। यहां तक की खिलाड़ियों को ठहराया भी लोगों के घरों में जाता था। तब पांच या सात सितारों होटलों का चलन नहीं था, लेकिन आज ऐसा नहीं है। धीरे-धीरे क्रिकेट लोकप्रिय होता गया और खिलाड़ियों का पारिश्रामिक भी बढ़ता गया। 1996 के विश्व कप के बाद तो क्रिकेट की मार्केटिंग ने ऐसा रंग जमाया कि खिलाड़ी, क्रिकेट बोर्ड और क्रिकेट संगठन सभी निहाल हो गए।

वरना जब चिन्नास्वामी बोर्ड अध्यक्ष थे तब सुनील गावस्कर को खिलाड़ियों की मैच फीस बढ़वाने के लिए बहुत मेहनत और कोशिश करनी पड़ी थी। मौजूदा हालात में पूरा क्रिकेट बदल गया, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो घरेलू ढांचा। बदलाव के दौर में जहां ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी कई धुरंधर टीम खत्म हो गई तो वही भारत उतनी ही मजबूती के साथ उभर कर सामने आया।

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देश की घरेलू टी-20 लीग सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी - फोटो : सोशल मीडिया
क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बेहतर खेल स्तर और अधिक अवसरों के मद्देनजर रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट शुरू किए। रणजी ट्रॉफी की शुरुआत तो आजादी के 13 साल पहले ही हो गई थी। रणजी ट्रॉफी शुरू होने के 27 साल बाद 1961-62 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने दिलीप सिंह के नाम पर दिलीप ट्रॉफी की शुरुआत की।

इन राष्ट्रीय स्पर्धाओं ने इंटरनेशनल लेवल पर स्थापित उन खिलाड़ियों को प्रोत्साहन एवं प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया है, जिसके कारण वे दूसरों से आगे निकल गए। भारत में घरेलू टी-20 ट्रॉफी का नाम सैयद मुश्ताक अली के नाम पर है। रविवार को इसके खिताबी मुकाबले में गत विजेता कर्नाटक और तमिलनाडु आमने-सामने होंगे।

आखिर कौन थे सैयद मुश्ताक अली?

सैयद मुश्ताक अली - फोटो : सोशल मीडिया
19 साल की उम्र में डेब्यू करने वाले मुश्ताक अली इंदौर में पैदा हुए थे। सैयद मुश्ताक अली विदेशी धरती पर शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज थे, उन्होंने ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर 1936 में शतक लगाया था। मुश्ताक अली ने यूं तो 11 टेस्ट मैच खेले लेकिन इतने से सफर में उन्होंने दो बड़े यादगार लम्हे अपने नाम दर्ज कर लिए।

37 की उम्र में उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला और यह भारत की इंग्लैंड पर पहली टेस्ट जीत थी। 1951-52 में भारत ने चेन्नै के मैदान पर यह जीत हासिल की थी। उनके डेब्यू से लेकर आखिरी टेस्ट तक भारत ने 22 टेस्ट मैच खेले और इसमें से उन्होंने आधे मैच ही खेले। 

1933-34 में इंग्लैंड के खिलाफ कोलकाता में उन्होंने अपने करियर का पहला मैच खेला। वह बिना प्रबंधन को बताए गायब हो गए और इसका असर उनके करियर पर पड़ा। एक बार जब वह टीम का हिस्सा नहीं थे तो उनके फैंस ने कोलकाता में विरोध प्रदर्शन भी किया। लोग नारे लगाने लगे, 'मुश्ताक नहीं तो टेस्ट नहीं।'
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सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का इतिहास

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का आयोजन पहली बार 2008-09 को किया गया था। वर्ष 2006-07 के सीजन में बीसीसीआई ने अपनी स्वयं की राज्य संरचना शुरू की, जिसमें 27 रणजी टीमों को 5 जोन में विभाजित करके अंतरराज्यीय टी-20 चैंपियनशिप का नाम बदलकर सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के रूप में फिर से शुरू किया। वर्ष 2009-10 के सीजन में इंदौर की महारानी उशाराजे ट्रस्ट क्रिकेट ग्राउंड में महाराष्ट्र ने फाइनल मुकाबले में हैदराबाद 19 से हराकर पहली सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी प्रतियोगिता जीती थी।

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2018 के विजेता

भारत में एक टी-20 प्रतियोगिता, के रूप में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का 11वां संस्करण जारी है। 8 नवंबर से शुरू हुए इस टूर्नामेंट का फाइनल 1 दिसंबर, रविवार को होगा। पिछले संस्करण में दिल्ली को हराते हुए फाइनल में महाराष्ट्र को आठ विकेट से हराकर कर्नाटक ने टूर्नामेंट जीता था।

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी विजेताओ की सूची:
 
सत्र विजेता का नाम उप-विजेता का नाम
2018/19 कर्नाटक महाराष्ट्र
2017/18 दिल्ली राजस्थान
2016/17 ईस्ट जोन सेंट्रल जोन
2015/16 उत्तर प्रदेश बड़ौदा
2014/15  गुजरात   पंजाब
2013/14    बड़ौदा उत्तर प्रदेश
2012/13  गुजरात   पंजाब
2011/12 बड़ौदा पंजाब
2010/11   बंगाल   मध्य प्रदेश
2009/10 महाराष्ट्र हैदराबाद
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