भारतीय क्रिकेट के कुछ ऐसे गौरवमयी पल हैं, जो हमेशा क्रिकेट प्रेमियों के दिलों दिमाग में छाए रहेंगे। जिनमें से कुछ का उल्लेख हम यहां करेंगे। कपिल देव की कप्तानी में टीम इंडिया ने जून 1983 में इंग्लैंड के लार्ड्स में वेस्ट इंडीज को हराकर पहली बार विश्व कप जीता था। 1985 में गावस्कर की कप्तानी में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में पाकिस्तान को हराकर बेंसन एंड हेजेज सीरीज जीती थी। रवि शास्त्री को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। उन्हें ऑडी कार इनाम में मिली थी। टीम इंडिया ने 2 अप्रैल 2011 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक बार फिर वन डे का विश्व कप जीता।
मैच विनर कप्तान धोनी का धमाल
एमएस धोनी
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महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने 24 सितंबर 2007 को दक्षिण अफ्रीका में टी-20 का विश्व कप जीता। नवंबर 2008 में टीम इंडिया पहली बार टेस्ट में नंबर वन बनी। धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने श्रीलंका को मुंबई में विशाल अंतर से हराकर यह मुकाम हासिल किया। 2013 में चैंपियंस ट्राफी टीम इंडिया ने दूसरी बार जीती। धोनी की कप्तानी में इंग्लैंड को उसी के घर में हराकर टीम इंडिया ने यह कारनामा किया। इससे पहले 2002 में टीम इंडिया ने चैंपियंस ट्राफी जीती थी।
सचिन ने रिकॉर्डों की लगाई झड़ी
सचिन तेंदुलकर
अनिल कुंबले ने 1999 में दिल्ली के कोटला में पाकिस्तान के खिलाफ एक पारी के सभी 10 विकेट लिए थे। सचिन तेंदुलकर ने 16 मार्च 2012 को मीरपुर में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का 100 वां शतक लगाया था। सचिन ने 1998 अप्रैल में शारजाह में कंगारुओं के खिलाफ अपने वन डे करियर की दो बड़ी पारियां खेली थी। सचिन ने इस टूर्नामेंट में दो शतक लगाए और भारत को फाइनल में जीत दिलाई। वीरेंद्र सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में 2004 में 309 रन बनाए थे। यह किसी भारतीय का पहला तिहरा शतक था। सहवाग ने 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई में 318 रन बनाए थे। दो तिहरा शतक लगाने वाले सहवाग अकेले भारतीय हैं।