बता दें कि हरमनप्रीत पश्चिम रेलवे के कार्यालय में बतौर अधीक्षक तीन साल पूरे कर चुकी थीं। उन्होंने पिछले साल इस पद से इस्तीफा दिया था। पंजाब पुलिस के साथ डीएसपी पद के लिए उनका मेडिकल टेस्ट पहले ही पूरा हो गया था, लेकिन भारतीय रेलवे ने उन्हें पदमुक्त नहीं किया था, जिससे वह पंजाब पुलिस से नहीं जुड़ सकीं।
गौरतलब है कि इससे पहले हरमनप्रीत के पिता ने खुलासा किया था कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए पहले कई बार सरकारी नौकरी की मांग की थी, लेकिन हार बार उन्हें केवल आश्वासन ही दिया गया। जब हरमनप्रीत ने खुद को काबिल बना लिया तो उन्हें कई विशेष महकमों पर बतौर अधिकारी नियुक्त करने के ऑफर मिलने लगे।