राज्यसभा सांसद हरभजन ने अपने पत्र में लिखा "मामले की जड़ यह है कि पीसीए अपने पक्ष में संतुलन को झुकाने के लिए मतदान के अधिकार के साथ 150 सदस्यों को शामिल करने के लिए भरपूर कोशिश कर रहा है। यह सब बीसीसीआई,सामान्य निकाय और मुख्य सलाहकार की सहमति के बिना किया जा रहा है। इसलिए, यह बीसीसीआई संविधान, पीसीए के दिशानिर्देशों और खेल निकायों की पारदर्शिता और नैतिक मानदंडों के खिलाफ है।
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उन्होंने आगे लिखा, "अपनी अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए, वे पीसीए की औपचारिक बैठकें आयोजित नहीं कर रहे हैं और अपने स्वार्थ के लिए सभी निर्णय खुद ले रहे हैं।"
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अपने पत्र के बारे में पूछे जाने पर, हरभजन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, "मुझे 10-15 दिनों से शिकायतें मिल रही हैं कि शीर्ष अधिकारी किस तरीके से अपना काम कर रहे हैं। मुझे मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है, लेकिन कई योजनाओं से जुड़े फैसलों के बारे में बार-बार अंधेरे में रखा जा रहा है। "आज, मुझे बताया गया कि वे पहले ही 60-70 लोगों की सदस्यता के लिए पैसे ले चुके हैं। इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने की जरूरत है। मेरे पास सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से लिखने और मुख्यमंत्री को सूचित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।"