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पढ़ाई में बेहद कमजोर थे क्रुणाल पांड्या: बच्चों को क्रिकेटर बनाने के लिए पिता ने छोड़ दिया था शहर

Wed, 24 Mar 2021 12:37 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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क्रुणाल पांड्या - फोटो : ट्विटर @ICC
एक रात पहले पुणे में धमाकेदार डेब्यू करने वाले क्रुणाल पांड्या का आज जन्मदिन है। 24 मार्च 1991 को जन्में क्रुणाल पांड्या आज अपना 30वां जन्मदिन मना रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू वन-डे में इतिहास रचने वाले क्रुणाल मैच से पहले और बाद में दोनों वक्त भावुक नजर आए। वह अपने पिता को याद कर रहे थे, जिन्हें उन्होंने हाल ही में खोया है। जीत के बाद उन्होंने अपनी इस पारी को पिता को समर्पित किया। ट्वीट में लिखा भी कि, 'मैच के दौरान आप मेरे साथ ही थे।'
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दिवंगत पिता हिमांशु के साथ हार्दिक और क्रुणाल पांड्या - फोटो : instagram@hardikpandya93
भारतीय क्रिकेट में नौ साल बाद ऐसा मौका आया जब दो भाइयों की जोड़ी ने एक साथ टीम में धमाल मचाया हो। दोनों भाई आज भारतीय क्रिकेट में जाना-पहचान नाम हैं और इसके पीछे उनके पिता का अहम योगदान रहा। यही कारण रहा कि दोनों अपनी कामयाबी के पीछे पिता के संघर्षों को हमेशा श्रेय देते रहे और उनकी अहमियत को जानते रहे। पिता के त्याग को देखते हुए दोनों बेटों ने भी खूब मेहनत और संघर्ष किया।
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दिवंगत पिता हिमांशु के साथ हार्दिक और क्रुणाल पांड्या - फोटो : instagram@hardikpandya93
इस साल 16 जनवरी को क्रुणाल और हार्दिक ने अपने पिता को खो दिया था। सुबह-सुबह दिल का दौरा पड़ने से हिमांशु पांड्या की मौत हुई थी। पिता के निधन की खबर सुनकर दोनों क्रिकेटरों के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। पिता के संघर्षों का इनाम भी मिला जब दोनों ही भाइयों का आईपीएल में चयन हो गया। पांड्या भले ही आज अपने स्टाइल स्टेटमेंट, बिंदास और आलीशान जीवनशैली के लिए मशहूर हैं, लेकिन कभी इस खिलाड़ी ने जीवन में बेहद कठिन दौर भी देखे हैं।

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क्रुणाल पांड्या - फोटो : twitter@BCCI
गुजरात के इस ऑलराउंडर को आईपीएल से पहचान मिली और जैसे ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिला तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से लपक लिया। क्रुणाल टी-20 टीम में पहले ही डेब्यू कर चुके हैं अब उन्हें वन-डे में मौका मिला, जिसे उन्होंने जमकर भुनाया। स्पिन गेंदबाजी के साथ-साथ विस्पफोटक पारी खेलने में सक्षम क्रुणाल से पहले ही छोटे भाई हार्दिक टीम में स्थायी जगह बना चुके हैं और विश्व के सक्रिय सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर्स की लिस्ट में शामिल हैं।
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हार्दिक पांड्या का पूरा परिवार - फोटो : सोशल मीडिया
क्रुणाल-हार्दिक के पिता हिमांशु पांड्या गुजरात के सूरत में फाइनेंस का व्यापार करते थे। उन्हें 1998 में इसे बंद करना पड़ा और पूरा परिवार फिर बड़ौदा चला गया। हिमांशु पांड्या क्रिकेट के बहुत बड़े दीवाने थे और वह अपने दोनों बेटों (को मैच दिखाने के लिए ले जाते थे। यहीं से हार्दिक और क्रुणाल को क्रिकेटर बनने की प्रेरणा मिली। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद भी हिमांशु ने अपने बेटों को बड़ौदा में किरण मोरे क्रिकेट अकादमी में भेजा, जहां से दोनों के क्रिकेटर बनने की यात्रा शुरू हुई।
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डेब्यू मैच के दौरान भावुक क्रुणाल पांड्या - फोटो : amar ujala
एक चैनल से बातचीत करते हुए क्रुणाल ने खुद बताया था कि वह 10वीं में तीन बार फेल हुए, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और फिर बाद में कॉलेज भी पास किया। पैसों की तंगी के चलते क्रुणाल को काफी संघर्ष भी करना पड़ा। स्पीड पोस्ट में सरकारी नौकरी के ट्रायल के लिए लेटर आया था। उसी दिन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए भी ट्रायल मैच था। तब क्रुणाल ने सरकारी नौकरी का लेटर फाड़कर दमदार खेल दिखाया और बड़ौदा की टीम में शामिल हो गए, जिसमें हार्दिक पहले से थे।
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