मैच के बाद विहारी ने मैच में आंध्र प्रदेश के लिए अपने अविश्वसनीय योगदान के बारे में बात की और खुलासा किया कि टीम फीजियो ने उन्हें बार-बार बल्लेबाजी नहीं करने के लिए कहा था। हालांकि, विहारी अपनी टीम के लिए खेलने के अपने निर्णय में अडिग रहे। विहारी ने कहा- जब मैंने कहा कि मैं बल्लेबाजी करना चाहता हूं, तो फीजियो ने मुझे 10 बार कहा कि अगर बल्लेबाजी करते समय मेरे हाथ पर फिर से चोट लगती है तो मेरा करियर खतरे में पड़ सकता है। मैंने फीजियो से कहा कि अगर मैं इस मैच के बाद क्रिकेट नहीं खेल पाऊं तो मुझे कोई हर्ज नहीं है, लेकिन अगर मैं इस मैच में आंध्र के लिए हार मान लेता हूं तो यह हमेशा मेरे दिल में रहेगा।
बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हनुमा विहारी
- फोटो : सोशल मीडिया
विहारी ने आगे कहा कि वह नॉकआउट मैच में लगी चोट से निराश हो गए थे और उन्होंने अपनी परवाह किए बिना बल्लेबाजी करने का फैसला किया। विहारी ने कहा- मैं परेशान हो गया था क्योंकि यह एक क्वार्टर फाइनल मैच था, आंध्र प्रदेश के लिए इतना महत्वपूर्ण मैच था और मैं बल्लेबाजी करने में सक्षम नहीं था। मुझे लगा कि अगर मैं आखिरी विकेट के लिए टीम के लिए 10 रन जोड़ सकता हूं तो भी यह एक फायदा होगा और मैंने इस चुनौती को स्वीकार किया। अब तक 16 टेस्ट मैचों में राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हनुमा विहारी ने कहा कि अगर आपको टीम के लिए ऐसा करने की सोचते हैं तो आपको हिम्मत मिलती है।
हालांकि, विहारी फिलहाल सबसे लंबे प्रारूप में भारतीय टीम से बाहर हैं। उन्होंने पिछले साल जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ पुनर्निर्धारित पांचवें टेस्ट में अपनी आखिरी उपस्थिति दर्ज की थी। हालांकि, यह बल्लेबाज अपनी वापसी को लेकर सकारात्मक है। विहारी ने कहा- निश्चित रूप से कुछ निराशा होगी, लेकिन मेरा काम घरेलू क्रिकेट में अधिक रन बनाना है और मैं वापसी करने के लिए ऐसा करने की कोशिश करूंगा। मुझे विश्वास है कि अगर मैं घरेलू क्रिकेट में एक या दो सत्र में बड़े रन बनाता हूं और अपनी टीम के लिए मैच जीतता हूं तो मुझे फिर से भारत के लिए खुद को साबित करने का मौका मिलेगा।