जब चेतेश्वर पुजारा और ऋषभ पंत 148 रन की साझेदारी निभाकर पवेलियन लौट गए थे तब नहीं लग रहा था कि टीम इंडिया सिडनी में सोमवार को तीसरा मैच बचा पाएगी। पूरा एक सत्र बाकी था हनुमा के रूप में जो बल्लेबाज क्रीज पर था उसकी जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव था। जबकि पवेलियन में बैठे शेष चार बल्लेबाजों में सभी गेंदबाज थे जो एक ऑलराउंडर (रविंद्र जडेजा) था उनके अंगूठे में फ्रेक्चर था।
ऐसे हालात में हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन ने क्रीज पर ऐसे पांव जमाए कि ऑस्ट्रेलिया की जीत की उम्मीदें धूल में मिल गई। अश्विन जीत के बाद स्टंप लेकर पवेलियन लौटे हैं, उन्हें पता है जब भी मुश्किल हालात में संघर्ष के बाद मैच बचाने का जिक्र होगा तो यह मैच भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को याद आएगा। भारत ने 407 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए आखिर में 131 ओवरों में पांच विकेट पर 334 रन बनाए। जब मैच में एक ओवर बचा हुआ था तब दोनों टीमें ड्रॉ पर सहमत हो गई।
दूसरी पारी में 161 गेंदों पर नाबाद 23 रन बनाने हनुमा विहारी ने अपने जोड़ीदार अश्विन की भूमिका बड़े भाई की बताई। बीसीसीआई डॉट टीवी से बात करते हुए कहा हनुमा ने कहा, 'आखिरी ओवर में बल्लेबाजी करना शानदार अनुभव रहा, जब भी उन्हें महसूस होता था कि मैं थोड़ा निराश सा हो रहा हूं तो वह बड़े भाई की तरह बात कर रहे थे। वह मुझसे कह रहे थे कि एक बार में सिर्फ एक गेंद पर फोकस करो।'
बकौल विहारी, 'अगर चेतेश्वर पुजारा आखिरी तक होते तो भारत मैच जीत सकता था। उन्होंने कहा, 'उस मैच में ड्रॉ खेलना हमारे लिए शानदार परिणाम रहा। मुझे लगा था कि मैं चोटिल नहीं हूं और पुजारा यहां हैं तो हम परिणाम हमारे पक्ष में होगा और यह एक शानदार जीत होगी। लेकिन फिर भी 10 अंक मिलना बड़ी बात है।'
अश्विन 128 गेंदों पर 39 रन बनाकर नाबाद लौटे। बेशक सीरीज 1-1 से बराबरी पर हो पर सोमवार को ड्रॉ रहे तीसरे टेस्ट के साथ भारत ने चार मैचों की सीरीज में मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली है। अब ब्रिसबेन में 15 जनवरी से शुरू होने वाला चौथा और अंतिम टेस्ट मैच निर्णायक बन गया है। छठी बार किसी टीम ने ऑस्ट्रेलिया में 130 से ज्यादा ओवर खेल मैच बचाया।