टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में से एक सौरव गांगुली और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कोट
ग्रेग चैपल के बीच के विवाद को सभी आज एक दशक से ज्यादा हो, लेकिन गांगुली के जहन में अब भी वह कड़वी यादें जस की तस बनी हुई हैं।
इन दोनों के बीच का यह विवाद भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़े विवादों में से एक है। अपने और ग्रेग चैपल के बीच हुए इस विवाद पर
गांगुली ने क्रिकेट इतिहासकार बोरिया मजूमदार की किताब 'इलेवन गोड्स एंड ए बिलियन इंडियंस' में खुलकर बात की है। 500 पेज की इस किताब को
इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान लॉन्च की जाएगी।
गांगुली ने 2005 में जिम्बाब्वे में खेले जा रहे टेस्ट मैच की बात को याद करते हुए कहा कि एक दिन चैपल मेरे पास अपनी एक टीम का खाका तैयार करके लाते हैं। इस टीम को चैपल ने टेस्ट के लिए चुना था। मैं इस टीम को देखकर दंग था। इस टीम ऐसे खिलाड़ियों को शामिल नहीं किया गया था, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत योगदान दिया था।
चैपल ने जुलाई 2005 में मुख्य कोच के तौर पर पदभार संभाल लिया था, गांगुली पर धीमी ओवर गति के लिये मार्च 2005 में छह मैच का प्रतिबंध लगा हुआ था और राहुल द्रविड़ अंतरिम कप्तान थे। इसके बाद सितंबर 2005 में जिम्बाब्वे दौरे पर गांगुली को फिर से टीम की कप्तानी सौंपी गयी थी। गांगुली ने कहा, 'दौरे के शुरू से कुछ चीज सही नहीं थी। मैं नहीं जानता कि क्या हुआ था, लेकिन निश्चित रूप से किसी चीज की कमी थी।'
उन्होंने अपने और चैपल के रिश्ते के बारे में कहा, 'लेकिन जो कुछ भी हो, वह जिम्बाब्वे में वो चैपल नहीं थे, जिन्होंने दिसंबर 2003 में आस्ट्रेलियाई दौरे के लिये मुझे तैयार होने में मदद की थी।'