जैसा पिता वैसा बेटा, मिचेल मार्श ने यह कहावत इस विश्वकप में चरितार्थ कर दिखाई है। 36 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के ज्योफ मार्श ने भारत में ही हुए रिलायंस विश्वकप में भारत और न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक जड़े थे। अब उनके पुत्र मिचेल मार्श ने भारत में ही चल रहे विश्वकप में पाकिस्तान के खिलाफ शतक ठोक दिया। विश्वकप के 48 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब पिता और पुत्र दोनों ने विश्वकप में शतक लगाने की उपलब्धि हासिल की। यही नहीं यह पहला ऐसा विश्वकप है जिसमें पहले विश्वकप खेल चुके चार पिताओं के पुत्र शिरकत कर रहे हैं। न्यूजीलैंड के कार्यवाहक कप्तान टॉम लाथ के पिता रॉड लाथम, इंग्लैंड के सैम कुरेन के पिता केविन कुरेन (जिंबाब्वे), नीदरलैंड के बास डि लीडे के पिता टिम डि लीडे और ऑस्ट्रेलिया के मिचेल के पिता ज्योफ मार्श इससे पहले विश्वकप खेल चुके हैं।
मिचेल के पिता ने ऑस्ट्रेलिया को पहली बार बनाया था विजेता
1975 से लेकर अब तक सात पिता-पुत्र की जोडिय़ां विश्वकप में खेल चुकी हैं, लेकिन कभी पिता-पुत्र की ओर से शतक नहीं जड़े गए। मिचेल ने पाकिस्तान के खिलाफ 108 गेंद में 121 रन बनाकर विश्वकप में यह इतिहास भी लिख दिया। मिचेल के पिता ज्योफ ने 1987 के रिलायंस कप के पहले ही मैच में भारत के खिलाफ चेन्नई में 110 और न्यूजीलैंड के खिलाफ चंडीगढ़ में नाबाद 126 रन की पारियां खेली थीं। उन्होंने इस विश्वकप में दो शतक, एक अर्धशतक के साथ 61.14 की औसत से 428 रन बनाए थे। उनकी ऑस्ट्रेलिया को पहला विश्वकप जिताने में अहम भूमिका थी। 1992 के विश्वकप में उन्होंने पांच पारियों में दो अर्धशतक लगाकर 30.20 की औसत से 151 रन बनाए थे। मिचेल के बड़े भाई और ज्योफ के पुत्र शॉन मार्श भी 2019 के विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया के लिए दो मैच खेले। 2015 के बाद इस विश्वकप में खेल रहे मिचेल सात मैचों में 34.94 की औसत से 211 रन बना चुके हैं और पांच विकेट ले चुके हैं।
सैम के पिता केविन ने 83 में भारत को किया था परेशान
इस विश्वकप में खेल रहे न्यूजीलैंड के टॉम लाथम के पिता रॉड लाथम ने 1992 के विश्वकप में अपनी टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं इंग्लैंड के सैम कुरेन के पिता केविन जिंबाब्वे के जाने-माने ऑलराउंडर थे। वह दो विश्वकप में 11 मैच खेले और 287 रन बनाने के साथ नौ विकेट लिए। भारत के खिलाफ 1983 विश्वकप का वह मैच, जिसमें कपिल देव ने यादगार 175* रन की पारी खेली थी, उसमें भारत के 17 रन पर पांच विकेट गिराने में कुरेन की अहम भूमिका थी। उन्होंने मैच में तीन विकेट लेने के साथ बाद में 73 रन भी बनाए थे। उस दौरान जिंबाब्वे को टेस्ट का दर्जा नहीं होने के कारण वह टेस्ट नहीं खेल सके। नीदरलैंड के बास डि लीडे के पिता टिम डि लीडे ने तीन विश्वकप के 14 मैच में 18.58 की औसत से 223 रन, 38.85 की औसत से 14 विकेट लिए।
विश्वकप में पिता और पुत्र की जोड़ियां
डॉन प्रिंगल (1975) (ईस्ट अफ्रीका), डेरेक प्रिंगल (1987, 92) (इंग्लैंड)
लांस क्रेंस (1975, 79, 83) और क्रिस क्रेंस (1992, 96, 99, 2003)(न्यूजीलैंड)
रोजर बिन्नी (1983, 87), स्टुअर्ट बिन्नी (2015, मैच नहीं खेले) (भारत)
क्रिस ब्रॉड (1987) और स्टुअर्ट ब्रॉड (इंग्लैंड) (2007, 15)
ज्योफ मार्श (1987, 92) और शॉन (2019), मिचेल मार्श (2015, 2023) (ऑस्ट्रेलिया)
रॉड लाथम (1992) और टॉम लाथम (2015, 19, 23) (न्यूजीलैंड)
केविन कुरेन (जिंबाब्वे, 1983, 87) और टॉम (2019, मैच नहीं खेले), सैम कुरेन (इंग्लैंड, 2023)
टिम डि लीडे (1996, 2003, 07) और बास डि लीडे (2023)(नीदरलैंड)