महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर (फाइल फोटो)
गंभीर की माने तो धोनी ने विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए बल्लेबाजी क्रम में नीचे उतरकर मोर्चे से अगुवाई नहीं की। गंभीर ने कहा कि किसी और कप्तान ने ऐसा किया होता तो उसकी काफी आलोचना होती, लेकिन चूंकि वह धोनी हैं तो लोग इस बारे में बात भी नहीं कर रहे।
धोनी ने अपने से पहले सैम करन, ऋतुराज गायकवाड़ और केदार जाधव को भेजा। गंभीर ने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो मैं हैरान था। एमएस धोनी सातवें नंबर पर । रितुराज गायकवाड़ और सैम कुरेन उनसे पहले। इसका क्या मतलब था। आपको तो मोर्चे से अगुवाई करनी चाहिए।'
भारत के लिए 2003 से 2016 के बीच 58 टेस्ट और 147 वन-डे खेल चुके गंभीर ने कहा, 'फाफ अकेले किला लड़ाता रहा। जल्दी आउट होने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन कम से कम टीम को प्रेरित तो करना चाहिए। आखिरी ओवर में आपने क्या किया (तीन गेंद में तीन छक्के)। यही पहले किया होता तो नतीजा कुछ और होता।'
गंभीर ने कहा, 'शायद जीत की ललक ही नहीं थी। पहले छह ओवर के बाद लग रहा था कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी है। एमएस अंत तक टिककर टीम को मैच में लौटाने की कोशिश कर रहा था ताकि आने वाले मैचों में ऐसी पारियां खेल सके।