विश्व कप 2019 कई मायनों में खास रहा। जहां दुनिया को पहली बार एक नया विजेता देखने को मिला तो कई युवा खिलाड़ियों ने भी अपनी छाप छोड़ी। इस विश्व कप में कई ऐसी टीमें थी, जो अपने कद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं, तो वहीं कई खिलाड़ियों में फॉर्म, कंसिस्टेंसी और कई अहम फैक्टर्स की कमी दिखीं, तो चलिए डालते हैं उन खिलाड़ियों पर एक नजर...
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क्रिस गेल
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क्रिस गेल: टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही क्रिस गेल ने इस विश्व कप को अपना आखिरी टूर्नामेंट बता दिया था। जमैका के इस खिलाड़ी के बल्ले से 8 मैच में महज 242 रन ही निकल पाए। 30.25 की खराब औसत और 88.32 का लचर स्ट्राइक रेट यूनिवर्स बॉस के कद के साथ इंसाफ नहीं करता।
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मार्टिन गप्टिल
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मार्टिन गप्टिल: साल 2015 में खेले गए पिछले विश्व कप में गप्टिल के बल्ले से जमकर रन निकले थे, लेकिन इस बार रन बनाने के मामले में गप्टिल एकदम फिसड्डी साबित हुए। 20.86 की खराब औसत से 186 रन ही बना सके। मजेदार बात तो यह थी कि गप्टिल इस वर्ल्ड कप में दो बार 0 रन पर आउट हुए।
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हाशिम अमला
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हाशिम अमला: दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज हाशिम अमला ने 7 मैच में सिर्फ 203 रन ही बनाए। अमला ने 2 अर्धशतक तो मारा, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में एक भी छक्का नहीं मार पाए। ऐसी कोई पारी उनके बल्ले से नहीं निकली जो टीम को जीत दिलाने में कामयाब हो पाए।
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एम एस धोनी-केदार जाधव
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केदार जाधव: इस विश्व कप टीम इंडिया का मध्यक्रम बेहद कमजोर नजर आया। कई अहम मौकों पर वो खिलाड़ी नहीं चल पाए, जिनसे टीम को उम्मीदें थी। 34 वर्षीय जाधव न तो बल्ले के साथ कमाल दिखा पाए और न ही गेंद से अपनी छाप छोड़ पाए। 5 मैच में सिर्फ 80 रन ही बना पाए। जाधव की धीमी बल्लेबाजी के कारण ही उन्हें सेमीफाइनल में मौका नहीं दिया गया।
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ग्लेन मैक्सवेल
ग्लेन मैक्सवेल: एक समय ऑस्ट्रेलिया के लिए कई मैच जिताऊ पारी खेलने वाले मैक्सवेल भी इस विश्व कप में रंग में नजर नहीं आए। 100 से ज्यादा एकदिवसीय मुकाबलों का अनुभव रखने वाले मैक्सी 10 मुकाबलों में 177 रन ही बना पाए। औसत रहा 22.12।
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शोएब मलिक
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शोएब मलिक: पाकिस्तान का यह अनुभवी बल्लेबाज तीन मैच में कुल 8 रन ही बना पाया। मलिक का औसत इस दौरान 2.66 का था। टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में मलिक को ड्रॉप कर दिया गया था। गेंद की अगर बात करें तो मलिक को पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ 1 ही विकेट मिला। अंत में वर्ल्ड कप के बाद मलिक ने संन्यास की घोषणा कर दी थी।
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आंद्रे रसेल
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आंद्रे रसेल: यह खिलाड़ी IPL 2019 का सुपरस्टार था। बल्ले से जितना चमकदार खेल आईपीएल में दिखाया उतना ही खराब प्रदर्शन विश्व कप में किया। वेस्टइंडीज समेत दुनिया भर के फैंस को रसेल से धांसू खेल की उम्मीद थी। लंबे-लंबे छक्के और तेजतर्रार पारी की आशा थी। मगर रसेल ऐसे फेल हुए कि वेस्टइंडीज भी टूर्नामेंट में कुछ खास नहीं कर पाया।
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Sarfaraz Ahmed
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सरफराज अहमद: फरवरी 2017 में अजहर अली की कप्तानी छोड़ने के बाद सरफराज अहमद को पाकिस्तानी टीम की कमान सौंपी गई। 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद देशवासियों को कप्तान से विश्व कप जीत की आस थी। मगर अपना दूसरा विश्व कप खेल रहे सरफराज न तो बल्ले के साथ कमाल दिखा पाए और न ही कप्तानी में जमे। 8 मैच में कुल 143 रन बनाने के साथ उन्होंने सिर्फ एक ही अर्धशतक लगाया।
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राशिद खान का शर्मनाक रिकॉर्ड (ग्राफिक्स रोहित झा)
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राशिद खान: यह युवा खिलाड़ी भी अफगानिस्तान की उम्मीदों का बोझ नहीं उठा पाया। 9 मैच में इस खिलाड़ी ने सिर्फ 6 विकेट लिए, जहां इनका एवरेज 69.33 का रहा। पूरे टूर्नामेंट के दौरान 431 गेंदों में इस खिलाड़ी को 416 रन पड़े। इंग्लैंड के खिलाफ एक पारी में सर्वााधिक 11 छक्के खाने के बाद राशिद अपने नाम शर्मनाक रिकॉर्ड भी कर बैठे।
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मशरफे मुर्तजा
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मशरफे मुर्तजा: बांग्लादेश का विश्व कप 2019 में प्रदर्शन बेहतर ही रहा। शकिब-अल-हसन और मुश्फिकुर रहीम जैसे अनुभवी खिलाड़ियों ने गजब का खेल दिखाया, लेकिन कप्तानी संभाल रहे एक और सीनियर खिलाड़ी मुर्तजा बुझे-बुझे ही नजर आए। 35 वर्षीय इस खिलाड़ी ने 8 मुकाबलों में 336 गेंदें फेंकते हुए 361 रन लुटा दिए। इस दौरान उनके खाते में सिर्फ एक ही विकेट आया।
कुलदीप यादव: किसी वक्त टीम इंडिया अपने दो होनहार युवा स्पिनर्स कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल के बूते विश्व कप जीतने का सपना देख रही थी, लेकिन आईपीएल में पटरी से उतरी कुलदीप यादव की गाड़ी इस टूर्नामेंट में भी खराब ही दिखी। चाइनामैन को 7 मैच में कुल 6 विकेट मिले, जहां उनकी औसत 56.17 की रही।