वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज के चौथे वनडे में महेंद्र सिंह धोनी के 49ओवर तक बल्लेबाजी करने के बावजूद टीम इंडिया को 11 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान धोनी ने 108 गेंद में अर्धशतक जड़ा। यह उनके क्रिकेट करियर का सबसे धीमा अर्धशतक था। इस मैच के बाद धोनी की आलोचना का शुरू हुआ सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बहस में पूर्व पाकिस्तान क्रिकेटर रमीज रजा भी कूद गए हैं।
रजा ने धोनी को बीसीसीआई द्वारा ग्रेड ए कॉन्टैक्ट दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, धोनी टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। क्रिकेट बोर्ड को टेस्ट क्रिकेट का सम्मान करना चाहिए। बीसीसीआई को टेस्ट क्रिकेट का सम्मान करते हुए उन्हीं खिलाड़ियों को ग्रेड-ए कॉन्ट्रैक्ट देना चाहिए जो टेस्ट क्रिकेट के लिए उपलब्ध हों।
रजा ने कहा, आपको टेस्ट क्रिकेट का सम्मान करना चाहिए। एशिया में इसके लिए पहल क्रिकेट बोर्ड को करनी होगी। क्रिकेट बोर्ड ही टेस्ट क्रिकेट को तरजीह नहीं दे रहे हैं, उदाहरण के लिए एम एस धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया, शाहिद अफरीदी ने भी ऐसा किया लेकिन दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड ने इन खिलाड़ियों को ग्रेड-ए कॉन्ट्रैक्ट दिया। रजा ने ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि ऐसा करने से टेस्ट क्रिकेट को बचाया जा सकता है। हमने इसके लिए एशियन टेस्ट चैंपियनशिप की शुरुआत की थी। टेस्ट क्रिकेट को बचाने का यही रास्ता है।
रजा का यह कहना एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन से इस्तीफा देने वाले रामचंद्र गुहा ने की बात याद आती है। उन्होंने समिति से इस्तीफा देने के बाद विनोद राय को लिखे एक पत्र में कहा था, कि सुपर स्टार सिंड्रोम ने भारतीय क्रिकेट के कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को तबाह कर दिया है।