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Amar Ujala Samwad: घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश की चार रणजी टीम चाहते हैं सुरेश रैना, उदाहरण देकर बताया कारण

Fri, 18 Apr 2025 08:05 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

रैना ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की कम से कम चार टीमें होनी चाहिए क्योंकि यहां पर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।
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सुरेश रैना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर सुरेश रैना ने घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश की चार टीमें बनाने की पैरवी की है। रैना लखनऊ में आयोजित हुए अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे जहां उन्होंने अपने करियर, शुरुआत दिनों के संघर्ष और घरेलू क्रिकेट को लेकर राय रखी। रैना ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की कम से कम चार टीमें होनी चाहिए क्योंकि यहां पर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। 
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मिस्टर आईपीएल के नाम प्रसिद्ध पूर्व भारतीय ऑलराउंडर सुरेश रैना लखनऊ में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे। अमर उजाला संवाद के वैचारिक संवाद कार्यक्रम में देश की जानी मानी शख्सियतों, नीति नियंताओं, विचारकों और विशेषज्ञों के विचार जानने का मौका मिला और इसमें रैना ने भी शिरकत की। इस दौरान इस पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने अपने करियर को लेकर कई किस्से सुनाए और साथ ही युवा खिलाड़ियों को सलाह भी दी। 

'यूपी में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की भरमार'
कार्यक्रम के दौरान रैना से पूछा गया कि वो कौन से खिलाड़ी हैं जो भविष्य में भारतीय टीम के लिए खेल सकते हैं? इस पर रैना ने कहा, यूपी में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की भरमार है। उत्तर प्रदेश इतना बड़ा राज्य है कि यहां चार रणजी ट्रॉफी टीम बननी चाहिए। हमारा उत्तर अलग है, दक्षिण अलग है, पश्चिम अलग है। आप देखें गोरखपुर, बांदा, आजमगढ़, बनारस और उसके बाद लखनऊ में, प्रयागराज में अलग खिलाड़ी हैं, लखनऊ से आगे जाएंगे, आगरा, बुलंदशहर, मेरठ, नोएडा, शाहजहांपुर, शामली, फिर जो ये वाले लड़के हैं न, यहां के बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। 

ये भी पढ़ें: Amar Ujala Samwad: 'सीधा शाहरुख-प्रीति की टीम में जाना है', सुरेश रैना ने युवा खिलाड़ियों को क्या दी सलाह?
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रैना बोले - नहीं लगता चार टीमें बनेंगी
उन्होंने कहा, हुसैन जैदी का नाम आपने सुना होगा। इलाहाबाद से बहुत बड़े गेंदबाज थे वो। ज्याति यादव, ज्ञान पांडे मेरे पहले कप्तान थे। बड़े बड़े नाम थे। मैं खुद इलाहाबाद से हूं। उत्तर से खिलाड़ी आ नहीं रहे। तो मुझे लगता है कि चार टीमें बनेंगी तो और बच्चों को मौका मिलेगा। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि बीसीसीआई प्राइवेट बॉडी है और उनका जो स्टेट का कल्चर है वो अलग होता है। महाराष्ट्र को देख लीजिए, उनकी पुणे की भी टीम है, मुंबई की भी टीम है। गुजरात को देखेंगे तो उनकी राजकोट की टीम है, बड़ौदा की टीम है तो यूपी की और टीमें क्यों नहीं हो सकती? हमारे पास छह-सात बड़े बड़े स्टेडियम हैं। अभी बनारस में स्टेडियम बन रहा, लखनऊ में बहुत प्यारा स्टेडियम है। गाजियाबाद में भी स्टेडियम बन रहा है। तो मुझे लग रहा जो बच्चे यहां बैठे हैं, उनके लिए बहुत अच्छा होगा।

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