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Jasprit Bumrah: 'आप फिट होंगे या अनफिट', इस पूर्व मुख्य चयनकर्ता ने बुमराह के कार्यभार प्रबंध पर साधा निशाना

Sun, 10 Aug 2025 06:04 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पाटिल ने माना कि आजकल के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाओं और चिकित्सा सहायता का लाभ मिलता है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछली पीढ़ी के खिलाड़ियों में टीम के लिए कठिनाइयां सहने की अधिक इच्छा थी।
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जसप्रीत बुमराह - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारत के पूर्व क्रिकेटर और पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने जसप्रीत बुमराह के कार्यभार प्रबंध की नीति को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मौजूदा प्रबंधन पर निशाना साधा है। 1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे संदीप का मानना है कि क्रिकेट बोर्ड में उनके खेलने के दिनों या कार्यकाल के दौरान ऐसे उपायों पर कभी विचार नहीं किया गया। 
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बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले तीन मैच 
बुमराह ने हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ संपन्न हुई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में तीन मैच ही खेले थे। बुमराह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के दौरान सभी मैच में खेले थे, लेकिन अंतिम टेस्ट मैच में चोटिल हो गए थे। इसी कारण उनका कार्यभार प्रबंध किया गया था और उन्हें इंग्लैंड दौरे पर सभी मैच में नहीं उतारा गया। 

पाटिल ने कहा, मुझे हैरानी है कि बीसीसीआई इन सब बातों पर कैसे राजी हो रहा है? क्या फिजियो कप्तान से ज्यादा, 'मुख्य कोच से ज्यादा अहम है? चयनकर्ताओं का क्या? क्या अब हम उम्मीद करें कि फिजियो चयन समिति की बैठकों में बैठेगा? क्या वही फैसला लेगा?' उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रीय टीम के लिए चुने गए खिलाड़ियों को अपनी सीमा तक खुद को झोंकने के लिए तैयार रहना चाहिए। पाटिल ने उन महान क्रिकेटरों के उदाहरण दिए जिन्होंने टीम के लिए कष्ट सहकर भी खेला। 
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पाटिल ने गावस्कर-कपिल देव का दिया उदाहरण 
पाटिल ने कहा, जब आप अपने देश के लिए खेलने के लिए चुने जाते हैं, तो आप अपने देश के लिए मर मिटते हैं। आप एक योद्धा हैं। मैंने सुनील गावस्कर को मैच के पांचों दिन बल्लेबाजी करते देखा है, मैंने कपिल देव को टेस्ट मैच के ज्यादातर दिनों में गेंदबाजी करते देखा है, यहां तक कि नेट्स में भी हमें गेंदबाजी करते देखा है। उन्होंने कभी ब्रेक नहीं मांगा, कभी शिकायत नहीं की और उनका करियर 16 साल से ज्यादा लंबा चला। 1981 में ऑस्ट्रेलिया में सिर में चोट लगने के बाद भी मैंने अगला टेस्ट मैच नहीं छोड़ा था।

पाटिल ने माना कि आजकल के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाओं और चिकित्सा सहायता का लाभ मिलता है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछली पीढ़ी के खिलाड़ियों में टीम के लिए कठिनाइयां सहने की अधिक इच्छा थी। उन्होंने कहा, आजकल के खिलाड़ियों के पास सारी सुविधाएं हैं। हमारे खेलने के दिनों में ऐसे पुनर्वास कार्यक्रम नहीं थे। कई बार, चोटों के बावजूद हम खेलते रहे। हम देश के लिए खेलकर खुश थे।
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