भारतीय टीम के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन की प्रशंसा की जिन्होंने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। शास्त्री का कहना है कि लगातार बेहतरीन प्रदर्शन और विरोधी टीम की चिंता किए बिना अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने की ललक ने अश्विन को विशेष बनाया। अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के तीसरे मैच के बाद संन्यास की घोषणा कर दी थी। अश्विन ने भारत के दूसरे सफल स्पिनर के तौर पर अपना करियर समाप्त किया।
अश्विन से काफी प्रभावित हैं शास्त्री
शास्त्री ने आईसीसी रिव्यू कार्यक्रम में कहा, मुझे जो बात प्रभावित करती है , वह लगातार खुद को निखारने की अश्विन की ललक। वह यथास्थिति से कभी संतुष्ट नहीं होता। पिछले दो तीन साल में जिस तरह से उसने गेंदबाजी की है और अपने कौशल को निखारा है , वह अलग नजर आया है। वह नई चीजें सीखना चाहता था और उसने इस पर काफी मेहनत की। अश्विन ने हमेशा खुद को समय के साथ अपडेट रखा। वह मैच विनर रहा है और 537 टेस्ट विकेट इसके गवाह है। टेस्ट क्रिकेट में 500 से अधिक विकेट लेना खास है।
शास्त्री ने जडेजा-अश्विन की सराहना की
वेस्टइंडीज के खिलाफ 2011 में पदार्पण करने वाले अश्विन ने कुल 765 विकेट लिए जिनमें 537 टेस्ट विकेट हैं। शास्त्री ने कहा, पिछले चार पांच साल में अश्विन और रविंद्र जडेजा ने मिलकर बेहतरीन स्पिन जोड़ी बनाई। दोनों एक दूसरे के पूरक रहे। मैं यह कहूंगा कि पिछले पांच छह साल में जडेजा के विकेटों में अश्विन का और अश्विन के विकेटों में जडेजा का बड़ा योगदान रहा। बाएं हाथ के और दाहिने हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ अश्विन का रिकॉर्ड एक सा रहा है जो उसके हुनर का सबूत है। उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि वह किसे गेंदबाजी कर रहा है। वह हमेशा इसके लिए तैयार रहता था।