एक मैच के दौरान भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ असद रऊफ
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के एलीट पैनल के पूर्व अंपायर असद रऊफ का लाहौर में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। पाकिस्तान के रऊफ 66 साल के थे। उन्होंने 231 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग की थी। रऊफ अपने समय के बेहतरीन अंपायरों में एक थे। 2005 में उन्होंने पहली बार टेस्ट मैचों में अंपायरिंग की थी। उसके एक साल बाद उन्हें आईसीसी ने एलीट पैनल में शामिल किया था।
रऊफ ने 64 टेस्ट, 139 वनडे और 28 टी20 मैचों में अंपायरिंग की थी। इनमें से 15 टेस्ट, 41 वनडे और पांच टी20 थर्ड अंपायर के रूप में थे। अलीम डार के साथ वह पाकिस्तान के उन प्रसिद्ध अंपायरों में शामिल किए जाते हैं जिन्होंने देश में अंपायरिंग के स्तर को बढ़ाने में योगदान दिया। रऊफ मध्यक्रम में तेज बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने प्रथम श्रेणी करियर के दौरान नेशनल बैंक और रेलवे के लिए खेला। 71 प्रथम श्रेणी मैचों में उनका औसत 28.76 का था।
पाकिस्तानी विकेटकीपर-बल्लेबाज कामरान अकमल ने अपनी संवेदना व्यक्त करने के लिए ट्विटर पर लिखा, "आईसीसी के पूर्व अंपायर असद रऊफ के निधन की खबर जानकर दुख हुआ।" क्रिकेट मैचों में स्पॉट फिक्सिंग और मैच फिक्सिंग के आरोपों से रऊफ का करियर बर्बाद हो गया। 2013 में उन्हें मुंबई पुलिस ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग कांड की जांच में "वांटेड आरोपी" के रूप में नामित किया। तब रऊफ आईपीएल में अंपायरिंग कर रहे थे। उन्होंने उस आईपीएल सीजन के अंत से पहले भारत छोड़ दिया था और चैंपियंस ट्रॉफी से अपना नाम वापस ले लिया गया था।
इसके बाद उसी साल आईसीसी के एलीट पैनल से उन्हें हटा दिया गया। हालांकि, आईसीसी ने जोर देकर कहा था कि ऐसा इसलिए नहीं किया गया क्योंकि उनका नाम जांच में सामने आया। रऊफ ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए प्रदर्शन किया। उन्होंने जांच में सहयोग करने की बात कही। 2016 में बीसीसीआई ने रऊफ को भ्रष्टाचार और कदाचार के चार आरोपों में पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।