एक समय टीम इंडिया के सबसे सफलतम कोच रहे गैरी कर्स्टन का मानना है कि उनके उत्तराधिकारी डंकन फ्लेचर को भारतीय टीम के खिलाड़ियों में सामंजस्य बैठाने का पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए।गौरतलब है कि गैरी कर्स्टन की देख रेख में ही टीम इंडिया 28 साल बाद 2011 में वर्ल्ड कप जीती थी। वर्ल्ड कप के बाद कर्स्टन की जगह फ्लेचर टीम इंडिया के कोच नियुक्त हुए थे। उनके चार साल के कार्यकाल के दौरान सचिन तेंदुलकर, वीरेन्द्र सहवाग, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और जहीर खान अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर थे।
समाचार एजेंसी 'पीटीआई' से बातचीत में कर्स्टन ने कहा, ‘मुझे लगता है डंकन फ्लेचर और महेंद्र सिंह धोनी ने युवा खिलाड़ियों के खेल में बदलाव लाने के लिए ऐसा माहौल बनाया, जिससे उन्हें इंटरनेशनल क्रिकेट की चुनौतियों से निपटने का फायदा मिला।आम तौर पर आंकड़ों किसी की सफलता का पैमाना होते हैं, लेकिन कर्स्टन को लगता है कि बहुत सारी चीजें पीछे छूट जाती हैं। हर किसी के कोचिंग का तरीका अलग होता है और जरूरी नहीं की हर माहौल में कोई सहज रहे।'
उन्होंने आगे कहा कि, आमतौर पर कोच की सफलता का आकलन टीम के प्रदर्शन से होता है, लेकिन उससे बड़ी चीज यह है कि खिलाड़ी पर कोच का कितना प्रभाव पड़ता है। बता दें कि कर्स्टन आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स के मुख्य कोच रहे। वहीं, आईपीएल के इस सीजन में वो आरसीबी के बैटिंग कंसल्टेंट हैं।